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स्वीट कॉर्न की खेती / मीठी मक्का की खेती – Kisan Suvidha
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स्वीट कॉर्न की खेती / मीठी मक्का की खेती

स्वीट कॉर्न की खेती

स्वीट कॉर्न की खेती / मीठी मक्का की खेती

स्वीट कॉर्न का दाना सामान्य मक्का से मोटा होता है । इसे कच्चा या उबालकर खाया जा सकता है । यह सब्जी एवं अनेक तरह के पकवान जैसे स्वीट काॅर्न केक, स्वीट काॅर्न क्रीम स्टाइल आदि बनाने में भी प्रयुक्त होता है । हरा भुट्टा तोड़ने के तुरंत बाद पौधे को काटकर हरे चारे के रूप् में उपयोग में लाया जा सकता है । अधिक आय प्राप्त करने हेतु इसको गेंदा, ग्लैडियोलस, मसाले, मटर आदि के साथ रबी अर्थात् सर्दी के मौसम में अन्तः फसलीकरण (इन्टर क्राॅपिंग) भी किया जा सकता है ।

 

उत्पादन तकनीकी

स्वीट कॉर्न की बुआई के समय मिट्टी का उपयुक्त तापमान 20-250 सेल्सियस होता है लेकिन सुपर स्वीट (सार्वाधिक मीठा) की बुआई के वक्त मिट्टी का तापमान 160 सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए । स्टैंडर्ड स्वीट (मिठास की मात्रा 11% के करीब ) की बुआई के वक्त मिट्टी का तापमान 100 सेल्सियस से कम न हो ।

 

भूमि का चयन

सामान्यत: इसे सभी प्रकार की मिट्टियों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है पर बलुई दोमट मिट्टी से यथासंभव बचना चाहिए । खेत में जल निकास की व्यवस्था करना भी आवश्यक है । स्वीट कॉर्न की बुआई जिस खेत में करनी होती है उससे 250 मीटर की दूरी पर मक्का की कोई दूसरी किस्में नहीं उगाई जानी चाहिए । अगर 250 मीटर की दूरी के अन्तर्गत मक्का की कोई दूसरी किस्म खेत में उगाई जा रही हो तो बुआई इस प्रकार करनी चाहिए जिससे आस-पास के खेत में मक्का की नर मंजरी 14 दिन पहले या 14 दिन बाद में आए ।

 

खेत की तैयारी

खेत की जुताई एवं पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरी बनाकर समतल कर लेना चाहिए । बुआई के 10 दिन पहले लगभग 10-15 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर खेत में डालकर मिला देनी चाहिए ।

 

स्वीट कॉर्न की किस्में

किस्में संस्तुत कटाई की अवधि पैदावार
मौसम क्षेत्र
मधुरी प्रिया अल्मोड़ा खरीफ सम्पूर्ण भारत 70-75 दिन 110-120 क्विंटल/ हे. हरे भुट्टे
स्वीट काॅर्न, विन स्वीट काॅर्न रबी प्रायद्विपीय भारत में उगाया जाता है 80-85 दिन 250-400 क्विंटल/हे. हरा चारा
एचएससी-1 खरीफ हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखण्ड 70-75 दिन 120 क्विंटल/हे. हरे भुट्टे

 

स्वीट कॉर्न की बुआई का समय

खरीफ के मौसम में जून-जुलाई एवं रबी में 25 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक उत्तर भारत में बुआई की जानी चाहिए । प्रायद्विपीय भारत में इसकी साल भर बुआई की जा सकती है ।

 

बीज की मात्रा

सामान्य मधुरता वाली (स्टैण्डर्ड स्वीट) किस्मों के लिए 9-10 किग्रा./हे. एवं अधिक मधुरता वाली (सुपर स्वीट) किस्मों के लिए 5-6 किग्रा./हे. की दर से बीज पर्याप्त रहता है ।

 

पंक्तियों एवं पौधों की दूरी

स्वीट कॉर्न की बुआई 60 ग 25 सें.मी. या 75 ग 20 सें.मी. दूरी रखकर करें अर्थात् 60-75 सें.मी. कतारों के बीच की दूरी, तथा 20-25 सें.मी. पौधों के बीच की दूरी रखनी चाहिए ।

 

बीज उपचार

बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से बचाब के लिए बीज को थायरम 4 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए । तना छेदक एवं दीमक से बचार के लिए फिप्रोनिल 4 मि.ली./कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें ।

 

बुवाई का तरीका

स्वीट कॉर्न की बुआई कतारों में एवं मेंड़ों पर करनी चाहिए । सामान्यतः इसके बीज की बुवाई 2-3 सें.मी. की गहराई पर की जानी चाहिए, परन्तु अधिक मधुरता (सुपर स्वीट) वाली किस्मों को 2 सें.मी. की गहराई पर बुवाई करें । आरम्भ में प्रत्येक वांछित स्थानों पर 2 बीज डालें तथा इसके पश्चात् गर्मी में अंकुरण के 10 दिन और सर्दी में 15-20 दिन के बाद प्रत्येक वांछित स्थान पर एक पौधा ही रहने दें ।

 

उर्वरक प्रबन्धन

अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए 150 कि.ग्रा. नत्रजन, 60 कि.ग्रा. फाॅस्फोरस, 60 कि.ग्रा. पोटाश तथा 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट/हे. की दर से मिट्टी की जांच करवाकर प्रयोग करना चाहिए । फाॅस्फोरस, पोटाश ,जिंक सल्फेट की संपूर्ण मात्रा बुवाई के समय खेत में डालनी चाहिए तथा नत्रजन को 5 भागों में बांट कर निम्न अवस्थाओं में दर्शायी गई मात्रा के अनुसार प्रयोग करना चाहिए –

10%        नत्रजन        बुवाई के समय
20%       नत्रजन        4-5 पत्तों की अवस्था
30%       नत्रजन        8 पत्तों की अवस्था
30%       नत्रजन        पुष्पन अवस्था
10%       नत्रजन        भुट्टे की दूध वाली अवस्था के ठीक पहले ।

उर्वरक को बीज के 7-8 सें.मी. साइड में डालना चाहिए ।

 

खरपतवार प्रबंधन

चैड़ी पत्ती वाली खरपतवार एवं बहुत सी घासों को नियंत्रित करने के लिए एट्राजिन 1-1 5 कि.ग्रा./हे. को 500-600 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के तुरंत बाद एवं खरपतवार के अंकुरण के पहले छिड़काव करना चाहिए ।

 

जल प्रबंधन

अच्छी स्वीट कॉर्न की फसल हेतु हल्की मिट्टी में 7-8 सिंचाई और भारी मिट्टी में 4-5 सिंचाई की जरूरत पड़ती है । पौधे के पुष्पन एवं दाना भराव के समय सिंचाई अवश्य करनी चाहिए । सर्दी में 15 दिसम्बर से 15 फरवरी तक जमीन में नमी रहनी चाहिए ।

 

कीट प्रबंधन

तना छेदक प्रमुख हानिकारक कीट है । इसे नियंत्रित करने के लिए कार्बोफयूराॅन 3 जी को अंकुरण के 10 एक दिन बाद पौधे के गोभ में डालना चाहिए ।

 

अंर्तवर्तीय खेती (इन्टरक्राॅपिंग)

सर्दी में स्वीट कॉर्न के साथ गेंदा, ग्लैडियोलस, मसाले, मटर आदि सफलतापूर्वक उगाये जा सकते हैं । स्वीट कॉर्न को मेंड़ के दक्षिणी भाग में और अन्र्तवर्ती फसल (इन्टरक्राॅप) को मेंड़ के उत्तरी भाग में लगाना चाहिए । स्वीट कॉर्न में पंक्ति से पंक्ति की दूरी इन्टरक्रापिंग की स्थिति में 75 से.मी. रखनी चाहिए । अंर्तवर्तीय फसलों की खेती शहर के आसपास वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ।

कटाई

बीज के अंकुरण के लगभग 45 दिनों के बाद नर मंजरी आती है और इसके 2-3 दिनों के बाद मादा मंजरी (सिल्क) आती है । खरीफ के मौसम में परागण (पोलिनेशन) के 18-22 दिनों के बाद स्वीट कॉर्न के भुट्टे तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं सर्दी के मौसम में परागण के 25-30 दिनों के बाद भुट्टों की तुड़ाई की जा सकती है । इस अवस्था (तुड़ाई की अवस्था) की पहचान भुट्टे के ऊपरी भाग यानि सिल्क के सूखने से की जा सकती है या इस अवस्था में भुट्टे को नाखुन से दबाने से दूध जैसा तरल पदार्थ निकलने लगता है । भुट्टे की तुड़ाई सुबह या शाम में करनी चाहिए । हरे भुट्टे के तोड़ने के बाद बचे हुए हरे पौधे को चारे के रूप् में इस्तेमाल करना चाहिए ।

 

कटाई उपरान्त प्रबंधन

भुट्टे को तुड़ाई के ठीक बाद संसाधन इकाई (प्रोसेसिंग युनिट) या मंडी में पहुंचा देना चाहिए । भुट्टे को ढेर लगाकर नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे लकड़ी के डिब्बे (वुडेन क्रेट्स), कार्टून आदि में रखना चाहिए । कमरे के तापमान पर (रूम टेम्परेचर) पर चैबीस (24) घंटे के अंदर मधु मक्का के भुट्टे का 50% या उससे अधिक भाग शर्करा के दूसरे रूप में बदल जाता है अतः इन्हें हाइड्रोकुलिंग एवं पैकेजिंग करके शीत गृह (कोल्ड स्टोरेज) में रखा जाता है । भुट्टे को एक जगह से दूसरे जगह ले लाने में भी बर्फ की मदद से ठंडा करके रखना चाहिए या रेफ्रिजिरेटेड ट्रक का प्रयोग करना चाहिए । भुट्टे को प्लास्टिक के ट्रे में रखकर ले जाना चाहिए |

 

Source-

  • मक्का अनुसंधान निदेशालय

 

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