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संकर धान के बीज उत्पादन के लिए कृषि क्रियाओं का पैकेज – Kisan Suvidha
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संकर धान के बीज उत्पादन के लिए कृषि क्रियाओं का पैकेज

संकर धान का बीज उत्पादन

संकर धान के बीज उत्पादन के लिए कृषि क्रियाओं का पैकेज

संकर धान के बीज उत्पादन की प्रौद्योगिकी उच्च उत्पादक किसमो की तुलना में एकदम अलग है संकर बीज का उत्पादन न केवल प्रत्येक वर्ष आवश्यक है बल्कि अधिकतम उत्पादन प्राप्ति के लिए एफ1 बीज की 99% आनुवांशिक शुद्धता आवश्यक है|

आदर्श परिस्थितियां

मौसम

खरीफ मौसम की बजाए बीजोत्पादन के लिए रबी मौसम बेहतर है । दिन का औसत तापमान 24-300सेंटीग्रेड और पुष्पन के दौरान अच्छी धूप निकलना आवश्यक है ।

 

स्थान

बीज उत्पादन के लिए अच्छी सिंचाई और अच्छी निकासी वाली उर्वर भूमि उपयुक्त है । ऐसा स्थान चुनें जहां पिछली फसल धान की न ली गई हो ताकि स्वैच्छिक पौधों के पनपने की समस्या न हो ।

 

पृथक्करण

100 मी. से ज्यादा पृथक्करण अथवा 21 दिन का समय पृथक्करण 100 मी. के दायरे में चारो तरफ धान की कोई किस्म नहीं होनी चाहिए । समय पृथक्करण के संबंध में आसपास उगाई गई अन्य किस्मों और इसके पुष्पन के बीच 21 दिन का अन्तर होना चाहिए ।

 

बुआई

पैतृक वंशों की अवधि में अन्तर के कारण, बीज उत्पादन में दो पैतृक वंशों के पुष्पन में समानकालिकता के लिए विभेदक बुआई का प्रयोग करना चाहिए । यदि नर पैतृक में पुष्पन मादा पैतृक की तुलना में दस दिन पिछेती है, तो 4-5 दिन के अन्तराल पर दो तिथियों पर बुआई करके पहले नर पैतृक ( ’आर’ वंश ) को बोना चाहिए । इसके बाद पहली ’आर’ पंक्ति को बोने के दस दिन बाद एक बार ही मादा पैतृक को बोना चाहिए ।

बीज दर
  बीज
मादा बीज 15 कि.ग्रा.
नर बीज 8 कि.ग्रा.

 

दिन-1 दिन-5
नर वंश (आर-1) नर वंश (आर-2)
(4 कि.ग्रा.) (4 कि.ग्रा.)

 

नर्सरी प्रबंधन

  • पैतृक वंशों के बीजों को 20-25 वर्ग मी. की दर से छितराकर बोना चाहिए ताकि सुदृढ़, स्वस्थ और कई कल्लों वाली पौध 20-25 दिन में प्राप्त की जा सके ।
  • एक मीटर चैड़ाई और सुविधानुसार लंबाई की उचित जल निकासी वाली गीली क्यारियां तैयार करें । 23 कि.ग्रा. बीज बोने के लिए कुल 1000 से 1200 वर्ग मीटर नर्सरी क्षेत्र की आवश्यकता है ।
  • नर्सरी क्षेत्र में 250 कि.ग्रा. घूरे की खाद, 1 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 0.4 कि.ग्रा. फाॅस्फोरस और 0.5 कि.ग्रा. पोटाश प्रति 100 वर्ग मीटर प्रयोग करें
  • पैतृक बीज को 12-15 घंटे तक भिगोयें । इन भिगोये बीजों को कार्बेन्डाजिम (50% डब्ल्यू पी) की 4 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें । बेहतर फुटाव के लिए 1-2 दिन तक बीजों को बोरों में अंकुरित होने के लिए रखें ।
  • अंकुरित बीजों को अच्छी तरह तैयार क्यारियों में एकसार छितराकर बोयें । पानी की हल्की परत बनाये रखें और क्यारियां सूखने न पायें ।+  नर्सरी क्यारियों में बुआई के 15 दिन बाद 0.6 से 0.8 कि.ग्रा. नाइट्रोजन प्रति 100 वर्ग मीटर क्षेत्र में टाॅपड्रैसिंग करें ।
  • आवश्यकता अनुसार उचित पादप सुरक्षा उपाय अपनायें ।

 

संकर धान के लिए मुख्य खेत का प्रबंधन

खेत की तैयारी और नर्सरी उगाना

बार-बार जुताई करने के बाद गीली जुताई करके खेत की तैयारी करें और रोपाई से दो सप्ताह पहले घूरे की खाद डालें । रोपाई से एक दिन पहले 50% नाइट्रोजन की संस्तुत मात्रा और 75% पोटाश और फाॅस्फोरस की पूरी मात्रा डालें और भूमि को समतल कर दें ।

 

रोपाई

जब नर पैतृक की दूसरी बुआई की पौध 25 दिन की हो जाए तो पहली और दूसरी बुआई की पौध उखाड़ लें और उन्हें अच्छी तरह मिला लें और जुड़वा पंक्तियों में बो दें । बोते वक्त मादा पैतृक पौध के लिए 8 पंक्ति का स्थान छोड़ दें । नर पैतृक की 3-4 पौध प्रति उठाव रोपें । उसके बाद मादा पैतृक की पौध उखाड़ लें और नर पैतृक की पंक्तियों के बीच की 8 पंक्तियों में 1-2 पौध प्रति उठाव रोप दें ।
नर पैतृक को 30 X 15 सें.मी. के फासले पर लगायें और मादा पैतृक को 15 X  15 सें.मी. के फासले पर लगायें । पंक्ति अनुपात 2 नर: 8 मादा रखें तथा नर और मादा पंक्ति के बीच का फासला 20 सें.मी. रहे ।

 

खरपतवार नियंत्रण

50-70 कि.ग्रा. रेत में 2.5 – 3.0 कि.ग्रा. ब्यूटाक्लोर को मिलाकर रोपाई के 5-6 दिन बाद एक हैक्टेयर क्षेत्र में प्रयोग करें । 3-4 दिन तक खेत में एक समान रूप से 2 से.मी. पानी खड़ा रहने दें । स्वस्थ फसल के लिए आवश्यकतानुसार हाथ से खरपतवार निकाल दें ।

 

पोषण प्रबंधन

150 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फाॅस्फोरस, 80 कि.ग्रा. पोटाश और 15 टन घूरे की खाद/है. की संस्तुति की गई है । इसके अतिरिक्त 50 कि.ग्रा./है. जिंक सल्फेट (तीन साल में एक बार) भी प्रयोग करना चाहिए । रोपाई के 30-35 दिन बाद संस्तुत नाइट्रोजन की 25% मात्रा का प्रयोग करें और बाकी 25% नाइट्रोजन और 25% पोटाश रोपाई के 70-75 दिन बाद बाली बनने की प्रारंभिक अवस्था पर दें । फाॅस्फोरस और जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा आधार रूप में दें ।

 

जल प्रबंधन

शुरूआती 30 दिन तक पानी की हल्की परत बनाये रखें और जब फसल अधिकतम कल्ले फूटने की अवस्था पर पहुंच जाये तो 4-5 से.मी. पानी बनाये रखें । अधिकतम कल्ले फूटने की अवस्था के बाद 4 से 5 दिन के लिए पानी निकाल दें ताकि पिछेती कल्ले उत्पन्न न हों । कटाई से 10 दिन पहले खेत से सारा पानी निकाल दें ।

 

विशेष बीज उत्पादन क्रियाएं

छंटाई

यह बीज उत्पादन खेतों से अवांछित धान पौधों को निकालने की प्रक्रिया है । संकर बीज की शुद्धता बनाये रखना बेहद जरूरी है । अतः बुआई से कटाई तक विभिन्न अवस्थाओं में विजातीय पौधें को निकाल दें । हालांकि यह पूरे फसल काल के दौरान चलने वाली एक सतत प्रक्रिया है, फिर भी इसे विभिन्न तीन अवस्थाओं में करना आवश्यक है जैसे अधिकतम कल्ले फूटने की अवस्था पर, पुष्पन से पहले और पुष्पन के दौरान और कटाई से एकदम पहले । विभिन्न वृद्धि अवस्थाओं में छंटाई करने के लिए मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं ।

अवस्था लक्षण
वानस्पतिक कार्यिक लक्षण जैसे पौधे की ऊँचाई, पौधे की किस्म, पत्ती का आकार और रंग, तना, पत्ती, पत्ती आवरण का रंग आदि |
पुष्पन से पहले और पुष्पन के दौरान अगेती और पिछेती किस्में, पुष्पगुच्छ किस्म, शूक की उपस्थिति या अनुपस्थिति, पुष्पगुच्छ निकलना, शूकका का आकार, परागकोष का रंग आदि |
कटाई से पहले मादा पैतृक पर बीज की संख्या अनुसार (यदि मादा पैतृक पर बीज 70% से ज्यादा हो) तो ऐसे पौधों का सम्पूर्ण निरीक्षण आवश्यक है, जैसे दाने का प्रकार, दाने का आकार आदि |

पुष्पन का पूर्वानुमान और समायोजन

अधिक बीजोत्पादन के लिए नर और मादा पुष्पन की सही समकालिकता आवश्यक है । आदर्श समकालिकता के लिए मादा पैतृक को नर पैतृक की तुलना में 2-3 दिन आगे होना चाहिए । इसका पूर्वानुमान मादा और नर पंक्तियों में पुष्पगुच्छ बनने की अवस्था का निरीक्षण करके लगाया जा सकता है । पुष्पगुच्छ विकास की आठ अवस्थायें हैं

अवस्था संख्या विकास पुष्पन से पूर्व लगभग दिन पुष्पगुछ की लगभग लम्बाई (मि.मी.)
1. पुष्पगुछ प्रारम्भ 30 0.2
2. प्राथमिक शाखा प्रारम्भ 27 0.4
3. दिव्तीय शाखा प्रारम्भ 24 1.5
4. पुंकेसर और स्त्रीकेसर प्रारम्भ 20 2.0
5. पराग मातृ कोशिकाए 17 10-25
6. अर्द्धसूत्री विभाजन 12 80
7. परिपक्व पराग 6 190-250
8. पराग की परिपक्व अवस्था 4 260

जब नर पंक्ति की तुलना में मादा पंक्ति अगेती होती है (जैसे डी आर आर एच 1 ) तो  पुष्पगुच्छ विकास की पहली 3 अवस्थाओं में मादा पंक्ति की तुलना में नर पंक्ति एक अवस्था पहले होनी चाहिए । अगली 3 अवस्थाओं में नर और मादा पंक्तियां एक ही अवस्था में होनी चाहिए । यदि नर और मादा पंक्ति का अंतर 7-8 दिन का है, तो समकालिकता का समायोजन दो तरह से किया जा सकता है, जैसे जल प्रबंधन और पोषण विलयन के छिड़काव से ।

नर पैतृक के पुष्पन के समायोजन के लिए जल प्रबंधन प्रभावकारी है । नर पैतृक के पुष्पन को देरी से करने के लिए 4-5 दिन के लिए सिंचाई जल को पूरी तरह निकाल दें । नर पैतृक के जल्दी पुष्पन के लिए 4-5 से.मी. जल बनाये रखें । दोनों पैतृक पंक्तियों में पुष्पन के समायोजन के लिए पोषक विलयन का प्रयोग किया जा सकता है । 2% यूरिया के छिड़काव से पुष्पन में देरी की जा सकती है और फाॅस्फेट उर्वरक के 1:प्रयोग से पुष्पन में तेजी आ सकती है । स्थिति और समस्या की गंभीरता के अनुसार, किसी भी तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है । दुर्लभ स्थिति में यदि नर और मादा पुष्पन में 10 दिन का अंतराल हो तो अगेती पैतृक पंक्ति में प्रमुख पुष्पगुच्छ हटाकर और 2% यूरिया का छिड़काव या 30-40 कि.ग्रा./है. नाइट्रोजन तत्व का प्रयोग करें ।

 

शीर्ष पत्ती हटाना

सही समय पर शीर्ष पत्ती हटाकर बेहतर परागण होता है । आरम्भिक अवस्था में तेज चाकू से शीर्ष पत्ती को एक तिहाई या आधा काट लें । यदि खेत में पत्ती अंगमारी रोग का प्रकोप हो तो शीर्ष पत्ती न हटायें अन्यथा रोग आगे तक फैल जाएगा ।

 

जिबरेलिक एसिड (GA3) का प्रयोग

वर्तमान में व्यवसायिक बीज उत्पादन में प्रयुक्त सभी सी एम एस पंक्तियों में, पुष्पगुच्छ पूरा नहीं निकलता क्योंकि 20-25% तक पुष्पगुच्छ शीर्ष पत्ती के भीतर ही रह जाता है । इसलिए लगभग एक चैथाई शूकिकायें संकरण के लिए उपलब्ध नहीं होती GA3 प्रयोग से पुष्पगुच्छ निकलने, वर्तिकाग्र निकलने और बीज बनने में सुधार होता है । GA3  प्रयोग की सही अवस्था 5-10% आरंभिक फुटाव पर है (जब 100 कल्लों से 5-10 पर आरंभिक फुटाव आता है) ।GA3  की संस्तुत मात्रा को 70% एल्कोहल में घोलकर सारणी के अनुसार छिड़काव करें –

छिड़काव छिड़काव का प्रकार
नैपसैक यू एल वी
GA3 मात्रा (ग्रा./है.) 50 20
प्रथम छिड़काव (पहला दिन) 20 ग्रा., 500 ली. पानी में 10 ग्रा., 20 ली. पानी में
दिव्तीय छिड़काव (अगले दिन) 30 ग्रा., 500 ली. पानी में 15 ग्रा., 20 ली. पानी में

GA3 छिड़काव का प्रयोग नैपसैक या यू एल वी छिड़काव से सुविधानुसार धूप वाले दिन सुबह या शाम को दोनों मादा और नर पंक्तियों पर करें ।

 

पूरक परागण

स्व-परागित फसल होने के कारण, धान में परागकणों का छितराव और नतीजतन प्राकृतिक संकरण कम होता है । संकरण और बीज दर को बढ़ावा देने के लिए पूरक परागण पद्धति अपनायी जाती है । नर पंक्तियों के बीच जाकर दो लंबी (2 से 3 मीटर) बांस की डंडियों से प्रमुख परागण् की अवस्था में पौधों को हिलायें । मौसम के अनुसार, परागण का समय अलग-अलग होता है, पुष्पगुच्छ में पहली शूकिका के खुलने के आधे घंटे बाद पौधे में प्रमुख परागण काल होता है । मौसम और स्थान के अनुसार 9.00 से 11.30 बजे सुबह शुरू करके दिन में 3-4 बार पूरक परागण करें ।

 

रोग और नाशीकीट प्रबंधन

अन्य धान किस्मों के समान, संकर किस्मों में भी रोग, कीट और नाशीजीवों से नुकसान पहुंचता है । कुछ नाशीकीटों और रोगों के सामान्य नियंत्रण उपाय इस प्रकार हैं –

 

कटाई और गहाई

  • जब नर पैतृक के पुष्पगुच्छ के निचले हिस्से में दाने दूध बनने की अवस्था (50% पुष्पन के लगभग बीसवें दिन) में आ जायें तो खेत से पानी निकाल दें । दानों को सख्त होने दें । पुष्पन के 30-35 दिन बाद कटाई करें जबकि डंठल अभी हरे हों ताकि दाने न गिरें ।
  • पहले नर पंक्ति की कटाई करें । गहाई के बाद दानों को सुखा लें और गहाई की जगह से फसल को हटाकर अलग से भण्डारण करें । ध्यान से खेत का निरीक्षण कर लें कि कहीं कोई नर पैतृक जमीन पर न छूट जाये या मादा पंक्तियों पर न गिरें ।
  • मादा पंक्तियों में अंतिम छंटाई करें, विशेषतया जिनमें 70% से अधिक बीज बना हो । 70% से अधिक बीज वाली सभी बालियां हटा दें क्योंकि वे स्व या अलग किस्म  हो सकती हैं ।
  • मादा पंक्तियों की कटाई और गहाई अलग-अलग करें । गहाई यंत्र को उपयोग से पहले अच्छी तरह साफ कर लें । मादा पैतृक पर लगे बीज ही संकर बीज हैं ।
  • बीज को कटाई के बाद 1-2 दिन सुखायें ताकि नमी दर 12-14% रह जाए । इन्हें साफ करके हवादार बोरों में भण्डारण करें । यदि पुराने बोरे प्रयोग करें तो इन्हें इस्तेमाल से पहले भली प्रकार साफ कर लें ।

उपज

अच्छी योजना और आदर्श प्रबंधन से 1.5 से 2.0 टन/है. तक औसत बीज प्राप्त किया जा सकता है ।

 

आर्थिकी

उपरोक्त संस्तुत कृषि क्रियाओं को अपनाकर वृहत स्तरीय बीज उत्पादन क्षेत्रों में औसत बीज उत्पादन दर 2.0 से 2.5 टन/है. प्राप्त की जा सकती है । 30-40 रुपये प्रति कि.ग्रा. के औसत समर्थन मूल्य पर कुल आमदनी 60,000 से 80,000 रु. प्रति हैक्टेयर तक होती है । खेती की कुल लागत 25,000 से 30,000 रु. प्रति हैक्टेयर तक होती है । इसलिए संकर धान बीज उत्पादन से शुद्ध लाभ 35,000 से 50,000 रु. प्रति हैक्टेयर तक प्राप्त किया जा सकता है ।

 

स्रोत-

Comment

  • Subhash chandravanshi
    29/08/2017 at 9:22 AM

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