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मध्यप्रदेष कृषि में महिलाओं की भागीदारी (मापवा) योजना – Kisan Suvidha
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मध्यप्रदेष कृषि में महिलाओं की भागीदारी (मापवा) योजना

मध्यप्रदेष कृषि में महिलाओं की भागीदारी (मापवा) योजना

मापवा योजना

मध्यप्रदेष कृषि में महिलाओं की भागीदारी ( Madhya Pradesh Women in agriculture) परियोजना (प्रथम चरण) वर्ष 1994 में, डेनमार्क सरकार की सहायता से मध्य प्रदेश के 7 जिलों -जबलपुर, नरसिंहपुर, छिन्दवाड़ा, मंडला, रायसेन, शहडोल एवं बिलासपुर (अब छत्तीसगढ़ में) में प्रारम्भ की गई थी। परियोजना के द्वितीय चरण में कटनी, उमरिया, डिंडोरी, सिवनी, सतना, अनूपपुर एवं बालाघाट जिले शामिल किये गये । परियोजना दिसम्बर 2005 तक प्रभावशील रही। परियोजना के अंतर्गत क्षेत्र में पदस्थ महिला विस्तार कर्मियों  द्वारा कृषि कार्य में लगी महिला कृषकों को कृषि की कम लागत तकनीकी का प्रशिक्षण देकर उनकी कृषि में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की गई । परियोजना के अनुभवों को देखते हुए विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में 11वीं पंचवर्षीय योजनान्तर्गत वर्ष 2007-08 से कृषि में महिलाओं की भागीदारी (मापवा) योजना लागू की गई है। योजना हेतु वर्ष 2007-08 में रू. 100 लाख का आवंटन प्राप्त हुआ है।

योजना का उद्देष्य महिला कृषकों के जीवनयापन स्तर में सुधार कर उसमें स्थायित्व लाना है। इस हेतु विभाग के सामान्य विस्तार-तंत्र को प्रशिक्षित कर, महिला कृषकों विषेषकर किसान दीदी को कृषि तकनीकि प्रशिक्षण देने एवं उनको तकनीकि हस्तांतरण करने योग्य बनाना है। जिलों में महिला कृषकों को कम लागत की तकनीकि चुनने, उसे समझने एवं अपनाने योग्य बनाना है, साथ ही सामान्य कृषि विस्तार-तंत्र को मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण के माध्यम से जेण्डर के प्रति संवेदनशील बनाकर उनमें वैज्ञानिक, विस्तार कार्यकत्र्ता एवं कृषकों के बीच परस्पर संबंध विकसित करने एवं नेतृत्व करने की योग्यता का विकास करना है।

इस योजना का कार्य जिले मे पदस्थ वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी करेगें। महिला अधिकारी विषेष रूप से इस योजना मे कार्य करेगीं।

योजना के प्रमुख घटक बेंच मार्क सर्वे, तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसरण-भ्रमण, विशेष प्रशिक्षण, अंतर्जिला अध्ययन भ्रमण, समूह गठन प्रषिक्षण, कृषक महिला समूह गठन, मानव संसाधन विकास, एवं प्रचार प्रसार हैं।

 

Source-

  • mp.gov.in

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