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भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान द्वारा विकसित बाजरे की किस्में – Kisan Suvidha
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भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान द्वारा विकसित बाजरे की किस्में

बाजरे की किस्में

भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान द्वारा विकसित बाजरे की किस्में

बाजरे की किस्में इस प्रकार है:-

1.पूसा कम्पोजिट 612

विमोचन वर्षः 2010 (सी.वी.आर.सी.)

अनुमोदित क्षेत्रः महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश

परिस्थितिया: बारानी व सिंचित अवस्थाओं में बुवाई के लिए

औसत उपजः 25 कुन्तल/हेक्टेयर

विशेषताएं: यह एक दोहरे उपयोग वाली किस्म है, जो चारा तथा दानों के रूप में प्रयोग की जा सकती है। यह किस्म 80-85 दिनों में पकती है तथा डाउनी मिल्ड्यू बीमारी के प्रति प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रतिरोधक है। यह सामान्य व पछेती बुवाई दोनों के लिए उपयुक्त है।

 

2.पूसा कम्पोजिट 443

विमोचन वर्षः 2008 (सी.वी.आर.सी.)

अनुमोदित क्षेत्रः राजस्थान, गुजरात, हरियाणा

परिस्थितियां: बारानी अवस्थाओं में बुवाई के लिए

औसत उपजः 18 कुन्तल/हेक्टेयर

विशेषताएं: यह एक शीघ्र पकने व बढ़ने वाली किस्म है जो डाउनी मिल्ड्यु बीमारी की प्रतिरोधी है तथा जल अभाव वाली परिस्थितियों, जहाँ 400 मि.मी. से कम वर्षा होती है, के लिए उपयुक्त है।

 

3.पूसा कम्पोजिट 383

विमोचन वर्षः 2001 (सी.वी.आर.सी.)

अनुमोदित क्षेत्रः राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश, पंजाब एवं दिल्ली

परिस्थितियां: बारानी एव सिंचित अवस्थाओं में बुवाई के लिए

औसत उपजः 22-24 कुन्तल/हेक्टेयर

विशेषताएं:किसान थोड़े से प्रशिक्षण से अपनी उपज को बीज के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। यह एक दोहरे उपयोग वाली किस्म है। दानों के अलावा इसका तना पशुओं का पौष्टिक आहार है।

 

4.पूसा संकर 415

विमोचन वर्षः 1999 (सी.वी.आर.सी.)

अनुमोदित क्षेत्रः राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब एवं दिल्ली

परिस्थितियां: बारानी एव सिंचित अवस्थाओं में बुवाई  के  लिए

औसत उपजः 23-25 कुन्तल/हेक्टेयर

विशेषताएं: यह किस्म 75-78 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, डाउनी मिल्ड्यु रोग की प्रतिरोधी है तथा इस किस्म मे सूखा के प्रति सहिष्णुता है।

 

5.पूसा संकर 605

विमोचन वर्षः 1999 (सी.वी.आर.सी.)

अनुमोदित क्षेत्र :राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर  प्रदेश, पंजाब एवं दिल्ली

परिस्थितियां:बारानी एवं सिंचित अवस्थाओं में बुवाई के लिए

औसत उपज: 22-24 कुन्तल/हेक्टेयर

विशेषताएं :यह किस्म 74-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है तथा डाउनी मिल्ड्यु रोग की प्रतिरोधी है। बारानी एवं सिंचित अवस्थाओं में इसका अच्छा प्रदर्शन रहता है।

 

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