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ड्रिप सिंचाई पद्धति के प्रमुख लाभ – Kisan Suvidha
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ड्रिप सिंचाई पद्धति के प्रमुख लाभ

ड्रिप सिंचाई पद्धति के प्रमुख लाभ

ड्रिप सिंचाई पद्धति के प्रमुख लाभ

प्रकृति द्वारा प्रदत्त अमूल्य निधि जल न हो तो मुक्त है न ही मुुफत न अनादि, न अनन्त क्योंकि आधुनिकता के इस दौर में आज हर व्यक्ति जल की महत्ता को जानता है और यह बात सर्वमान्य है कि विश्व व देश के पानी के स्त्रोतों में तेजी से कमी होती जा रही है । इस समस्या का एक ही समाधान है, जल का सही, सर्वोत्तम उपयोग करना । आज कृषि क्षेत्र में बगीचों में पौधों के जरूरत के अनुसार नियमित रूप से बूंद-बूंद पानी पौधों की जड़ों तक पहुंचाने हेतु सिंचाई की आधुनिक पद्धति ड्रिप सिंचाई का उपयोग लाभकारी होता जा रहा है ।

यह एक पूर्णतया स्थाई कार्यक्षम एवं लाभप्रद सिंचाई पद्धति है, जिसमें पानी की बचत सीजन दर सीजन, वर्ष दर वर्ष, भरपूर पैदावार, फसल की शीघ्र परिपक्वता तथा मजदूरी एवं खाद के अतिरिक्त बचत होती है । ड्रिप सिंचाई पद्धति फल उत्पादक, कृषकों के बगीचों हेतु प्रमुख रूप से उष्ण एवं समशीतोष्ण कटिबन्ध में लघु व सीमांत कृषकों के लिए सर्वथा उपयुक्त है । फसल बगीचे में पानी की एक-एक बूंद का उचित प्रबंधन इन पद्धति द्वारा किया जा सकता है ।

 

ड्रिप सिंचाई पद्धति के प्रमुख लाभ

1. पानी की 70 प्रतिशत बचत होती है, जिसका प्रयोग अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई हेतु कर सकते हैं ।

2.फसल के उत्पादन में 23 प्रतिशत तक वृद्धि पाई जाती है ।

3. फसल में निरंतर एक समान पानी का वितरण पौधों की जड़ों के समीप होता है । फलस्वरूप स्वस्थ वृद्धि व लाभ व शीघ्र फलदायी ।

4.  खाद व उर्वरकों के उपयोग दक्षता में 35 प्रतिशत तक वृद्धि होती है ।

5.  इस पद्धति के उपयोग से फल बगीचे की देखभाल, खाद, उर्वरक, ऊर्जा के खर्चों में कमी हो जाती है ।

6 ड्रिप पद्धति से खाद व कीटनाशकों को सही प्रमाण में स्वतः दिया जा सकता है ।

7. फसल उत्पादन हेतु खारे पानी, ऊँची-नीची व रेतीली जमीन का उपयोग संभव है ।

8.एक समय में एक साथ पूरे क्षेत्र में पानी का एक समान वितरण किया जा सकता है ।

9.पौधे व वृक्ष की आवश्यकता के अनुसार पानी के वितरण की सुविधा होती है ।

10.हर प्रकार के क्षेत्र में सिंचाई आसानी से की जा सकती है ।

11.कम पानी का अधिक से अधिक क्षेत्र व पौधों में वितरण आसानी से किया जा सकता है ।

12. भूमि की तैयारी में खर्चे की बचज, क्योंकि प्रक्षेत्र में नालियाँ क्यारियाँ बनाने में आवश्यकता न होने से खर्चे में बचत होती है ।

13. जल का सन्तुलित व समुचित उपयोग पौधों द्वारा होने से खरपतवार की समस्या कम होती है ।

 

आधुनिक दौर में जल की कमी व समय की मांग को देखते हुए हमारे कृषक भाई फल बगीचों में ड्रिप पद्धति द्वारा कम पानी, कम देखभाल कर एवं कम लागत पर अधिक से अधिक क्षेत्र की सिंचाई कर समान, उच्च गुणवत्ता युक्त, सुडोल फलों का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं । अतः ड्रिप सिंचाई पद्धति आज के समय में कृषकों हेतु अति लाभकारी है ।

 

स्रोत-

  • जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय जबलपुर

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