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टमाटर के प्रमुख कीट एवं नियंत्रण / Tomato Pests – Kisan Suvidha
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टमाटर के प्रमुख कीट एवं नियंत्रण / Tomato Pests

टमाटर के कीट

टमाटर के प्रमुख कीट एवं नियंत्रण / Tomato Pests

टमाटर के प्रमुख कीट इस प्रकार है:-

१.टमाटर का फल वेधक सुड़ी

सुड़ी टमाटर के कच्चे फलों में छेद करके उसके गुदे को खाती है। खाते समय सूड़ी के शरीर का अगला हिस्सा छेद के अन्दर रहता है और आधा हिस्सा (पिछला) छेद के बाहर रहता है। जिस फल पर यह सुराख कर देता है उसमें आसानी से फफूँदी का प्रकोप हो जाता है और फल पूर्ण रूप से सड़ जाता है। इसके नियंत्रण के लिए सूड़ी का प्रकोप हरे फलों में भी होता है इसलिए जब फल पूर्ण रूप से पक जाए तो छिड़काव करने की जरूरत नहीं होती है।

नियंत्रण

रोपाई के समय 16 कतार टमाटर के बाद एककतार गेंदा का फूल लगाने से टमाटर की फसल का बचाव कीड़ों से काफी हद तक हो जाता है। एच एन पी वी / 250 एल ई को गुड़ के साथ (10 ग्राम/लीटर), साबुन पाउडर (5 ग्राम/ली.) एवं टीनोपाल (1मिली/ली.) को पानी मिलाकर सांय काल में छिड़काव करें। इसके साथ-साथ अण्डा परजीवी कीट / 250000 प्रति हे.की दर से 10 दिनों के अन्तराल छोड़कर इस कीट का समुचित नियंत्रण सम्भव है। आवश्यकतानुसार किसी भी कीटनाशक जैसे रेनेक्सपायर 20 एससी / 0.35 मिली/ली. या साइजेपर 10 ओडी / 1.8 मिली/ली. या इन्डाक्साकार्ब 14कृ5 एससी / 1.0 मिली/ली. या नोवालुरान 10 ईसी/ 1.5 मिली/ली. या मेथोमिल 40 एसपी/ 1 ग्राम/ली. या लैम्डा साइहैलोथ्रिन 2.5 एससी़/ 0.6 मिली/ली. की दर से 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी में घोलकर छिडकाव करने से इसका नियंत्रण किया जा सकता है।

 

२.सफेद मक्खी (बैमीसिया टैबैकी)

यह सफेद एवं छोटे आकार का एक प्रमुख कीट है। पूरे शरीर मोम से ढका होता है इसलिए इससे सफेद मक्खी के नाम से जाना जाता है। इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ पौधों की पत्तियों से रस चूसते हैं और विषाणु रोग फैलाते हैं, जिससे पत्तियों में गुड़चापन (पत्ती मोड़) आने लगता है। इसके बाद फूल व फल नहीं लगते हैं।

नियंत्रण

बोने से पहले इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यू एस. या थायोमेथाक्जाम 70 डब्ल्यू एस. का 3 से 5 ग्राम/किग्रा. बीज से उपचारित करना चाहिए या पौध को कीटरोधक जाली (50-60 मेश) नेटहाउस जालीयुक्त सुरंगों, ग्रीन हाउस अथवा प्लास्टिक से बने घरो में उगाना चाहिए। यदि पौध को खुले खेत में उगाना हो तो 1 से 2 पीला चिपको वाला जाल (ट्रैप) 50-100 वर्ग मीटर की दूरी पर सफेद मक्खियों को फसाने के लिए फसल की लंबाई से थोड़ा उपर अथवा समानान्तर लगाना चाहिए जिससे अच्छी ट्रैपिंग हो सकें।

मक्का, ज्वार या बाजरा को मेड़ फसल/अन्तः सस्यन के रूप में उगाना चाहिए जो अवरोधक का कार्य करें एवं सफेद मक्खी का प्रकोप कम हो। नीम 5 प्रतिशत/ 0.5 मिली/ली. पानी की दर से छिड़काव करे। आवश्यकतानुसार कीटनाशक जैसे साइजेापर 10 ओडी/1.8 मिली/ली. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल/0.5 मिली/ली. या थायामेथेक्जाम 25 डब्लू जी./0.35 ग्राम/ली. या डाइमेथोएट 30 ई़सी./ 2.5 मिली./ ली. की दर से पानी में घोलकर 10-15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें।

 

प्रमुख रोग एवं नियंत्रण

१.पत्तियों का गुरचा विषाणु (पर्णकुंचन विषाणु)

इस रोग से ग्रसित पौधों की पत्तियाँ नीचे की ओर या कभी-कभी ऊपर की ओर मुड़ी हुई, अनियमित गुरचन या ऐंठन लिए हुए
होती है पौधे में दो गाँठों के बीज की दूरी कम हो जाने से पौधा छोटा एवं झाड़ीनुमा दिखाई देता है। और बाद में इस तरह से संक्रमित पौधों में फूल एवं फल नहीं बनते हैं।

नियंत्रण

रोगकारक विषाणु सफेद मक्खी द्वारा फैलता है। प्रभावी प्रबन्धन के लिए पौधशाला में पौध एग्रोनेट जाली के अन्दर तैयार करना चाहिए जिससे सफेद मक्खी के द्वारा रोग का फैलाव न हो। रोपाई के समय जड़ को कार्बोफ्यूरान दवा का 5 ग्राम प्रति लीटर गुनगुने पानी में घोल बनाकर पानी ठण्डा हो जाने पर 2-3 घण्टों तक शोधन करें अथवा रोपाई के समय खेत में 33 किग्रा. फ्यूराडान 3 जी. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिट्टी में मिला दें जिससे सूत्रकृमि का भी नियंत्रण हो सके। फूल आने तक अन्तःप्रवाही कीटनाशक रसायन जैसे इमिडाक्लोरोप्रिड (3 मिली प्रति 10 लीटर पानी) के घोल का छिड़काव करना चाहिए। रोग सहनशील प्रजातियों जैसे काशी अमन आदि का प्रयोग करें। संक्रमित पोधों को यथाशीघ्र उखाड़कर जला दें।

 

२.अगेती झुलसा

अगेती झुलसा में निचली पत्तियों से रोग के लक्षण दिखना प्रारम्भ होते हैं। हल्के भूरे से काले गहरे धब्बे जैसे पर्ण लक्षण प्रारम्भिक दशा में दिखाई देते है, जो कि रोग की उग्र दशा में गोल चक्रधारी धब्बे नुमा बन जाते है और सम्पूर्ण रोग संक्रमण फैलते ही पौधे सूखकर मर जाते हैं।

नियंत्रण

इस रोग की रोकथाम हेतु स्वस्थ बीजों का प्रयोग करें। बुआई के पहले, स्वस्थ बीजों का चयन करें। फसल चक्र में, गैर सोलनेसी कुल के पौधों का उपयोग करें।
फफूँदनाशक रसायन में मैंकोजेब 2 ग्रा./ली., जिनेब 2 ग्रा. /ली., साइमोक्सानिल $ मैंकोजेब 1.5-2 ग्रा. या एजोक्सीस्ट्राँबिन 1 ग्रा./ली. पानी के साथ छिड़काव करें।

 

 

स्रोत-

  • भारतीय सब्जी अनुसंधान संसथान,भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान

Comments:

  • Mahendra l Patel
    26/07/2017 at 5:37 PM

    Badiya jaankaari he sir.

  • Mahendra l Patel
    26/07/2017 at 5:38 PM

    Tometo ki jaankari det rahiye

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