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जैविक खेती से फसलो की ज्यादा पैदावार और ज्यादा आय – Kisan Suvidha
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जैविक खेती से फसलो की ज्यादा पैदावार और ज्यादा आय

जैविक खेती से फसल

जैविक खेती से फसलो की ज्यादा पैदावार और ज्यादा आय

फ़सल की लागत कम पानी कि मात्रा कम लगती है मृदा क संरचना सुधरती है जिस से फ़सल का विकास अच्छा होता है हर पर्यावरन सुधरता है मित्र कीटो के कारन उत्पादन बड़ता है|

जैव तत्व के कारन फ़सल मे अन्य तत्व कि उपलब्धता बढ़ जाती है

 

पौधो को जढ़ों तक हवा पानी अच्छे से मिलता है जिस से पौधा स्वस्थ होता है

आज आवश्यकता है की जैविक का उपयोग किसान करे ताकि इसे व्यावसायिक रूप से आगे ले सके. कुछ समूह और संस्थायें किसान समूहों के मध्यम से जैविक खेती का उत्पादन ले रही है, उनके समूह में प्रमानिकरण की फीस दर कम होती है अत: किसान का संगठित होके खेती का काम बहुत बचत करा सकता है. इन सब बातों में एक बात बेहद महत्वपूर्ण है वो की किसान को मानसिकता खेती के प्रति सम्मान जनक और व्यावसायिक हो जिस से वह प्रतिस्पार्धा के दौर में खेती से मान सामान पा सके .

 

विभिन्न जैव उरवरको से उपलबध पोशक तत्व (kg)

 खाद  नत्रजन  फ़ासफोरस  पोटाश  अन्य जैव तत्व
गोबर कि खाद 7.5 6 12 9.5
 नाडेप 10 7 13 13
 फ़ासफ़ो कम्पोस्ट 10 55 15 20
वर्मि कमपोस्ट 27 17.5 17.5 18
 बायो गैस सलरी 17.5 10 10 12

 

जैविक खादों का मृदा उर्वरता और फसल उत्पादन में महत्व

1. जैविक खादों के प्रयोग से मृदा का जैविक स्तर बढ़ता है, जिससे लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है और मृदा काफी     उपजाऊ बनी रहती है।

2. जैविक खाद पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ प्रदान कराते हैं, जो मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीवों के द्वारा पौधों को मिलते हैं, जिससे पौधे स्वस्थ बनते हैं और उत्पादन बढ़ता है।

3. रासायनिक खादों के मुकाबले जैविक खाद सस्ते, टिकाऊ बनाने में आसान होते हैं। इनके प्रयोग से मृदा में ह्यूमस की बढ़ोतरी होती है व मृदा की भौतिक दशा में सुधार होता है।

4. पौध वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तथा काफी मात्रा में गौण पोषक तत्वों की पूर्ति जैविक खादों के प्रयोग से ही हो जाती है।

5. कीटों, बीमारियों तथा खरपतवारों का नियंत्रण काफी हद तक फसल चक्र, कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं, प्रतिरोध किस्मों और जैव उत्पादों द्वारा ही कर लिया जाता है।

6. जैविक खादें सड़ने पर कार्बनिक अम्ल देती हैं जो भूमि के अघुलनशील तत्वों को घुलनशील अवस्था में परिवर्तित कर देती हैं, जिससे मृदा का पीएच मान 7 से कम हो जाता है। अतः इससे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है। यह तत्व फसल उत्पादन में आवश्यक है।

7. इन खादों के प्रयोग से पोषक तत्व पौधों को काफी समय तक मिलते हैं। यह खादें अपना अवशिष्ट गुण मृदा में छोड़ती हैं। अतः एक फसल में इन खादों के प्रयोग से दूसरी फसल को लाभ मिलता है। इससे मृदा उर्वरता का संतुलन ठीक रहता है।

 

अप्रत्यक्ष लाभ

जैविक खेती से कई अप्रत्यक्ष लाभ दोनों किसानो और उपभोक्ताओ के लिए उपलब्ध है! जबकि उपभोक्ताओ को बेहतर स्वादिष्ट स्वाद और पोषक मूल्यों के साथ स्वस्थ आहार मीलता है, किसान परोक्ष रूप से स्वस्थ मिट्टी और कृषि उत्पादन वातावरण से लाभान्वित होते है! पारिस्थितिक पर्यटन तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है और इटली जैसे देशो मे जैविक खेती पसंदिदा स्थलों मे परिवर्तित हो गए है. पारिस्थितिक तंत्र, वनस्पति, जीव और बढती जैव विविधता और मानवजाती के परिणामी लाभ के संरक्षण, जैविक खेती के महान लाभ है जो अभी तक ठीक से जिम्मेदार हो रहे है|

रोजगार के अवसर

 कई अध्ययनों के अनुसार, जैविक खेती मे पारंपरिक खेती प्रणाली की तुलना मे अधिक श्रम निवेश की आवश्यकता होती है. इस प्रकार भारत जहा श्रम बेरोजगारी और अल्प रोजगार की बहुत बड़ी संख्या है जैविक खेती को आकर्षण मिलेगा! इसके अलावा  क्यूंकि फसलो के विविधिकरण जैसे की अलग-अलग रोपण और कटाई के तरीके जिसके लिए और भी ज्यादा मजदुर लगते है, इससे समय-समय पर होने वाली बेरोजगारी की समस्या भी कम होती है|

 

Source-

  • kisanhelp.in

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