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गोभी वर्गीय सब्जियों के कीट और उनका प्रबंधन – Kisan Suvidha
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गोभी वर्गीय सब्जियों के कीट और उनका प्रबंधन

गोभी के कीट

गोभी वर्गीय सब्जियों के कीट और उनका प्रबंधन

गोभी वर्गीय सब्जियों के कीट इस प्रकार है:-

1.डायमंड बैक मौथ

डाइमण्ड बैक मौथकोल फसलों की सफल खेती में होने वाले पतझड़ के लिए जिम्मेदार एक सर्वदेशीय प्रमुख सुंडी है। युवा सुंडी देखने में क्रीमी – हरे रंग की तथा इसके हरे ऊतकों को खाने बे बाद पत्तों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं । बाद में जबकि, बड़े होकर सुंडी पत्तियों में छेद बना देती है और परिणामस्वरूप फसल में पतझड़ का कारण बनाता है जिससे विशाल नुकसान होता है ।

प्रबंधन
  • सरसों को 20:1 के अनुपात में अंतर्फसल के रूप में उगायें । जिससे डीवीएम सरसों के पत्तों पर अण्डे दे सके।
  • लर्वा को मारने के लिए सरसों की पंक्ति पर कर्टेप हाइड्रोक्लोराइड 1 ग्राम प्रति लीटर का छिड‌काव करें ।
  • रोपाई के बाद 10 दिनों के अंतराल पर 4 प्रतिशत नीम के बीजों के पाउडर  का छिड़काव करें ।
  • इंडोक्सोकर्व 14.5 प्रतिशत एस सी (Indoxacarb 14.5 % SC @ 0.75 ml / litre)
  • स्पाइनोसेड (सक्सेस) 45 एससी (Spinosad (Success) 45 SC @ 0.3 ml / litre)

 

2.माहुँ 

माहुँ  एक छोटा कीट हैं, जो पादप जूँ के रूप में जाना जाता है यह मेजबान पौधों की पत्तियों,  शिखर भाग तथा तने में अपने सुईनुमा मुँह को  डालकर रस चूसते हैं। माँहु द्वारा पौधों से दूध चूसने से उनमें मलिनकिरण, विरूपण और मोज़ेक के होने से पौधों में वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है । ये उच्च वायुमंडलीय सापेक्ष आर्द्रता के तहत विकसित अमृतनुमा काला साँवला रस छोड़ते हैं जो संश्लेषक गतिविधि के साथ हस्तक्षेप करता है । इनके त्वरित गुणनदर के कारण वे अपना जीवन काल 7-10 दिनों में पूरा कर लेते हैं तथा प्रतिदिन छह से दस युवा लोगों को जन्म देने के साथअपने जीवन काल में कुल 50-100 पीढ़ी को जन्म दे सकते हैं। इस प्रकार अपेक्षाकृत कम समय ये विशाल आबादी का निर्माण कर सकते हैं

प्रबंधन 
  • रोपाई के बाद 10 दिनों के अंतराल पर 4 प्रतिशत नीम के बीजों के पाउडर  तथा नीम सोप (1 %) का बारी-बारी से छिड़काव करें ।
  • अगर संख्या ज्यादा बढ़ जाये तो इमेडक्लोप्रिड 200 एसएल का 0.5 मिली प्रति लीटर  या रोगर 1.7 मिली कीदर से छिड‌काव करें।

 

3.बंदगोभी का सिर छेदक    

सिर छेदक पत्तागोभी और फूलगोभी के बंद के बनने की शुरूआती में हमला करता है । यह बढ़ रही बिंदु / बंद के अंदर गहराई तक छेद करता है और भीतर रहकर अंदर ही अंदर पूरा खा जाता है । बंद पर छरेनुमा आकृति कीट की उपस्थिति का संकेत देते हैं। कीट की गंभीर उपस्थिति के तहत, विशाल फसल हानि होने की उम्मीद की जा सकती है ।

प्रबंधन
  • लर्वा को मारने के लिए कर्टेप हाइड्रोक्लोराइड 1 ग्राम प्रति लीटर का छिड‌काव करें
  • रोपाई के बाद 10 दिनों के अंतराल पर 4 प्रतिशत नीम के बीजों के पाउडर  का छिड़काव करें
  • इंडोक्सोकर्व 14.5 प्रतिशत एस सी (Indoxacarb 14.5 % SC @ 0.75 ml / litre)
  • स्पाइनोसेड (सक्सेस) 45 एससी (Spinosad (Success) 45 SC @ 0.3ml / litre)

 

4.पत्ता वेबर

वयस्क पत्तियों के नीचे की सतह पर समूहों में अंडे देता है। यूथचारी लार्वा पौधों के प्रारंभिक चरणों में अत्यधिक गम्भीर रूप में आक्रमण करता है तथा बाद में पौधों के अंदर शेष भाग को अंदर ही अन्दर खा जाता है । जिससे शिखर भाग अवरुद्ध हो जाएगा और बंद नहीं बनेगा ।

प्रबंधन

• पत्ती, अंडे और लार्वा के विनाश तथा अधिक वृधि से बचाव के लिए क्षेत्र से हाथ से इकट्ठाकर नष्ट कर देने चाहिए।

• फसल पर कार्बेरिल (4%) या मेलाथियान (0.05%) का छिड़काव प्रभावी है

 

5.तंबाकू की सुंडी

प्रारंभिक चरण में लार्वा, चमकती लहराती लाइनों के साथ पतला हरे रंग का, झुंड में में दिखाई देते हैं और बाद में पौधों के विभिन्न भागों पर अलग-अलग दिखाई देते हैं । स्पोडोप्टेरा के कारण फसलों में पतझड़ के होने से काफी नुकसान होता है ।

प्रबंधन
  • गर्मियों के महीने में गहरी जुताई से कीट की अपरिपक्व चरणों का पर्दाफाश किया जा सकता है ।
  • खेत में अधिक पानी भरने से सुप्तावस्था लार्वा बाहर किये जा सकते हैं ।
  • पुरुष पतंगों को आकर्षित करने के लिए फीरोमोनजाल (फीरोडिनएसएल) 15 / हेक्टेयर की दर से प्रयोग कियेजा सकते हैं ।
  • खेत से सुंडी के अंडों तथा लार्वा को हाथ से इकट्ठा कर विनाश करके कीट की वृधि को कम किया जा सकता है ।
  • एसएल एनपीवी (1012 गुणा 1.5 पीओबी/ हेक्टेयर) + 2.5 किलोग्राम कच्ची चीनी + 0.1% टीपोल प्रतिहेक्टर की दर से छिड़काव करें ।
  • जहर चारा: चावल की भूसी 5 किलोग्राम + गुड़ या ब्राउन शुगर 500 ग्रा + कार्बेरिल 50 डव्लूपी500 ग्रा  3 पानी के साथ प्रति हेक्टेयर का प्रयोग किया जा सकता है ।
  • क्लोरपाइरीफोस 20ईसी लीटर प्रति हेक्टेयर या डाएक्लोरोफोस 76 डव्ल्यू एस सी एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें ।

 

जैविक कीट नियंत्रण

1.कैबेज मैगेट

यह जड़ों पर आक्रमण करता है जिसके कारण पौधे सुख जाते है |

रोकथाम

इसकी रोकथाम के लिए खेत में नीम कि खाद का प्रयोग करना चाहिए |

2.चैंपा

यह कीट पत्तियों और पौधों के अन्य कोमल भागों का रस चूसता है जिसके कारण पत्तिय पिली पड़ जाती है|

रोकथाम

इसकी रोकथाम के लिए नीम का काढ़ा को गोमूत्र के साथ मिलाकर अच्छी तरह मिश्रण तैयार कर 750 मि. ली. मिश्रण को प्रति पम्प के हिसाब से फसल में तर-बतर कर छिडकाव करें |

3.ग्रीन कैबेज वर्म

ये दोनों पत्तियों को खाते है जिसके कारण पत्तियों कि आकृति बिगड़ जाती है |

रोकथाम

इसकी रोकथाम के लिए  गोमूत्र नीम का तेल मिलाकर अच्छी तरह मिश्रण तैयार कर 500 मि. ली. मिश्रण को प्रति पम्प के हिसाब से फसल में तर-बतर कर छिडकाव करें |

4.डाईमंड बैकमोथ

यह मोथ भूरे या कत्थई रंग के होते है जो १ से. मि. लम्बे होते है इसके अंडे ०.५-०.८ मि. मी. व्यास के होते है इनकी सुंडी १ से. मी. लम्बी होती है जो पौधों कि पत्तियों के किनारों को खाती है |

रोकथाम

इसकी रोकथाम के लिए  गोमूत्र नीम का तेल मिलाकर अच्छी तरह मिश्रण तैयार कर 500 मि. ली. मिश्रण को प्रति पम्प के हिसाब से फसल में तर-बतर कर छिडकाव करें |बिमारियों  रोकथाम के लिए बीज को बोने से पूर्व गोमूत्र , कैरोसिन या नीम का तेल से बीज को उपचारित करके बोएं |गोभी वर्षीय फसलों को ऐसे क्षेत्र में उगाना नहीं चाहिए जिनमे इन रोगों का प्रकोप हो रहा हो सरसों वाले कुल के पौधों को इसके पास न उगायें |

 

Source-

  • krishisewa.com

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