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किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह 14 फरवरी 2018 तक लागू - Kisan Suvidha
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किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह 14 फरवरी 2018 तक लागू

किसानो के लिए सलाह

किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह 14 फरवरी 2018 तक लागू

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1. 11-12फरवरी को तेज हवाओ के साथ वर्षा के पुर्वानुमान को ध्यान में रखते हूऐ किसानों को सलाह है कि खड़ीफसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें व कीटनाशी/खरपतवारनाशी दवाईयों का छिड़काव ना करें।

2. मौसम को ध्यान में रखते हुए गेहूँ की फसल में रोगों, विशेषकर रतुआ की निगरानी करते रहें। काला, भूरा अथवा पीला रतुआ आने पर फसल में डाइथेन एम-45 (2.5 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव आसमान साफ़ होने पर करें। पीला रतुआ के लिये 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान उप्युक्त है। 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से ऊपर रोग काफैलाव नहीं होता। भूरा रतुआ के लिये 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमीयूक्त जलवायु आवश्यक है। काला रतुआ के लिये 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान ओर नमी रहित जलवायु आवश्यक है।

3. चने की फसल में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 20-25% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए।

4. इस सप्ताह तापमान को देखते हुए किसानों को सलाह है कि भिंडी की अगेती बुवाई हेतु ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका आदि किस्मों की बुवाई हेतु खेतों को पलेवा कर देसी खाद डालकर तैयार करें। बीज की मात्रा 10-15 कि.ग्रा./एकड़।

5. रबी फसलों एवं सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि यहपरांगण में सहायता करती है अत: जितना संभव होमघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें तथा दवाईयों का छिडकाव सर्दी के मौसम में सुबह या शाम के समय ही करें।

6. तापमान को मध्यनजर रखते हुए किसानों को सलाह है कि कद्दूवर्गीय सब्जियों, मिर्च, टमाटर, बेंगन आदि की बुवाई करें तथा टमाटर, मिर्च, कद्दूवर्गीय सब्जियों की तैयार पौधों की रोपाई कर सकते है। बीजों की व्यवस्था किसी प्रमाणिक स्रोत से करें।

7. मौसम को ध्यान में रखते हुएकिसानों को सलाह है कि आलू में पछेता झूलसारोग की निरंतर निगरानी करते रहें तथा प्रारम्भिक लक्षण दिखाई देने पर केप्टान @ 2 ग्राम\लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव आसमान साफ़ होने पर करें।

8. किसान एकल कटाई हेतु पालक (ज्योति), धनिया (पंत हरितमा), मेथी (पी.ई.बी, एच एम-1) की बुवाई कर सकते हैं।

9. गोभीवर्गीय फसल मेंहीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं।

10. मौसम को ध्यान में रखते हुएगाजर, मूली, चुकन्दर और शलगम की फसल की निराई-गुड़ाई करे तथा चेपा कीट की निगरानी करें।

11. मटर की फसल में फली छेदक कीट तथा टमाटर की फसल में फल छेदक कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड की दर से लगाए। यदि कीट अधिक हो तो बी.टी नियमन का छिड़काव आसमान साफ़ होने पर करें।

12. इस मौसम में गेंदे में पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की सम्भावना बढ जाती है अत: किसान फसल की निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखाई दें तो बाविस्टिन 1 ग्राम\लीटर अथवा इन्डोफिल-एम 45 @ 2.0 एम.एल\लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव आसमान साफ़ होने पर करें।

13. इस मौसम में मिली बग के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों पर चढ़ेगें, इसको रोकने हेतु किसान जमीन से 0.5 मीटर की ऊंचाई पर आम के तने के चारों तरफ 25 से 30 से.मी. चौड़ी अल्काथीन की पट्टी लपेटे। तने के आस-पास की मिट्टी की खुदाई करें जिससे उनके अंडे नष्ट हो जायेंगे।

 

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक 
  • डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
  • डा.जे.पी.एस. ड़बास(इंचार्ज व प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)
  • डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)
  • डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
  • डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

 

स्रोत- 

  • भाकृअप- भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान

 

Comment

  • Deepak Parmar
    13/02/2018 at 1:31 AM

    You are doing great job. Too good

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