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कपास का बीज परिक्षण – Kisan Suvidha
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कपास का बीज परिक्षण

कपास का बीज परिक्षण

कपास का बीज परिक्षण

कपास का बीज उपचार

  1. कपास का बीज बोने से पहले दस किलो बीज को एक लीटर गंधक के तीखे तेजाब से उपचारित करें जिससे फफूंद और कीट के अण्डों से बचाव हो।
  2. चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए बीजों को कार्बोफ्यूरान 4 ग्राम /किलो या इमीडाक्लोप्रिड 7 ग्राम /किलो की दर से उपचारित करें।
  3. विगलन एवं म्लानि रोगों के आक्रमण से बचाव के लिए ट्राइकोडर्मा विर्डी 4 ग्राम /कि.ग्रा. या कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम / कि.ग्रा. से उपचारित करें।

 

कपास का बीज शोधन 

  1. एक किलो बीज का शोधन 10 ग्राम एजेटोबैक्टर कल्चर से करें।
  2. शोधन के लिए गुड़ का एक लीटर पानी में घोल बनाए।उसमें 5 पैकेट ( 150 ग्राम प्रत्येक) कल्चर को मिलाये और 15 से 25 कि.ग्रा. बीज पर छिडक कर मिला दें।
  3. अच्छे प्रभाव के लिए बीजों के छोटे समूह बनाकर शोधन करें।
  4. तदोपरांत बीजों को छाया में सूखाकर तुरन्त बोनी करें।
  5. सूर्य की गर्मी एवं प्रकाश से उपचारित बीज को बचायें।

 

बीज दर और बोनी

  1. किस्मों, पौधे के विकास, मिट्टी की उपजाऊपन के आधार पर बीज दर निर्धारित की जाती है।
  2. अमेरिकी कपास के लिए बीज दर 15-25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर और देशी कपास के लिए बीज दर 10-18 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर है।
  3. बोनी की चौफली विधि में सामान्य किस्मों के लिए बीज दर 8-10 कि.ग्रा. और संकर किस्मों के लिए बीज दर 2.5 कि.ग्रा. है।
  4. सिंचित कपास में कतार की 75-90 से.मी. दूरी रखनी चाहिए।
  5. असिंचित कपास में कतार की 45-60 से.मी. दूरी रखनी चाहिए।
  6. बोनी की गहराई 2.5 से 3 से.मी. होनी चाहिए।
  7. सिंचित अवस्था में कतार से कतार की दूरी 75 से 90 से.मी. होनी चाहिए।
  8. असिंचित अवस्था में कतार से कतार की दूरी 45 से 60 से.मी. होनी चाहिए।
  9. असिंचित अवस्था में बुआई जून के अंतिम सप्ताह में मानसून के आने पर करनी चाहिए।
  10. सिंचित अवस्था में बुआई मई में की जा सकती है।
  11. कपास की बुआई चौफली और सरता विधियों द्वारा की जा सकती है।

 

Source

  • mpkrishi.org

 

 

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