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फसल उत्पादन बढ़ाने में सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण योगदान – Kisan Suvidha
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फसल उत्पादन बढ़ाने में सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण योगदान

सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्त्व

फसल उत्पादन बढ़ाने में सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण योगदान

पौधे अपनी जड़ों से अनेक तत्वों को ग्रहण करते हैं, लेकिन सभी फसलों के लिए आवश्यक नहीं है । रासायनिक विश्लेषण में पाया गया है कि पौधें अपनी जड़ों से 90 से अधिक तत्वों का अधिशोषण कर सकते हैं । इनमें जो तत्व पौधों की वृद्धि एवं विकास में सक्रिय भाग लेते हैं, वे आवश्यक पोषक तत्व कहलाते हैं । कैलिफोर्निया कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डी.आई. आरनाॅन 1954 ने आवश्यक तत्वों के बारे में तीन निष्कर्ष निकाले जो निम्न हैं:-

1. इन तत्वों की कमी होने से पौधे अपना जीवन चक्र पूरा नहीं कर सकते ।

2.विशेष पोषक तत्व की कमी के लक्षण को किसी अन्य तत्व को देकर सुधारा नहीं जा सकता ।

3.पोषक तत्व पौधों के पोषक एवं उपाच्चय क्रिया में सीधे भाग लेते हैं । इस कसौटी पर कसने से 90 तत्वों में से केवल 16 ही आवश्यक पोषक तत्व कहलाते हैं । पौधे के 95 से 99.5 प्रतिशत भाग का निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन तथा आॅक्सीजन से होता है, जबकि खनिज तत्वों से मात्र 0.5 से 5 प्रतिशत से ही पौधों का निमार्ण होता है ।

 

पौधों की आवश्यकता के आधार पर पोषक तत्वों को दो भागों में बांटते हैं, जो निम्न हैं:-

1.मुख्य पोषक तत्व जो पौधों में एक पी.पी.एम. से अधिक मात्रा में पाये जाते हैं, तथा इसकी आवश्यकता पौधों में अधिक मात्रा में पड़ती है । जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाशियम, कैल्शियम, मैगनेशियम एवं सल्फर ।

2. सूक्ष्म पोषक तत्व जो पौधों में एक पी.पी.एम. से कम मात्रा में विद्यमान रहता है और इसकी आवश्यकता मुख्य पोषक तत्वों से कम पड़ती तत्वों से कम पड़ती है जैसे लोहा, जिंक, कापर, मैगनीज, मोलिबिडिनम एवं बोरोन । सूक्ष्म पोषक  तत्वों का अर्थ यह नहीं कि इन तत्वों का फसल उत्पादन में कम महत्व है । इन पोषक तत्वों का फसल उत्पादन में उतना ही महत्व है, जितना अन्य पोषक तत्वों का है । सूक्ष्म पोषक तत्वों का अर्थ ऐसे पोषक तत्व जिनकी आवश्यकता पौधों के लिए अधिक उपजशील किस्मों के उपयोग से पोषक तत्वों के स्तर में गिरावट आ जाती है । यानि जिस मात्रा में पौधे इसे भूमि से शोषण कर रहे हैं, उस मात्रा में उसे मिट्टी में नहीं दिया जा रहा है, तथा कुछ पौधों का प्रभेद इतना सक्षम नहीं है कि सूक्ष्म तत्वों की कमी के लक्षण पौधे पर परीलक्षित हों ।

 

सूक्ष्म पोषक तत्वों का फसलों में योगदान

बोरान

  • यह कैल्शियम उपाच्य में भाग लेता है तथा कैल्शियम की घुलनशीलता को बढ़ाता है तथा उसका स्थानान्तरण करता है ।
  • यह नत्रजन के उदग्रहण में मदद करता है ।
  • इसकी कमी से दलहनी फसलों में गांठों का विकास नहीं होता जिससे नत्रजन स्थरीकरण कम मात्रा में होता है ।
  • यह खनिज ले जाने वाले इन्जाइमों को मदद करता है ।
  • यह कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक होता है ।
  • यह कैल्शियम / पोटाशियम अनुपात को उचित रखता है ।
  • इसकी कमी से पत्तियों एवं फलों में गलन हो जाता है । बोरन की कमी से पौधों में फेनोलिक अम्ल बढ़ जाता है, जिससे ऊतकों में गलन होने लगता है ।
  • यह कार्बोहाइड्रेट के उपाच्य में भाग लेता है तथा इसकी कमी में बांझपन एवं जनन भाग में विकृतियां हो जाती हैं ।

जस्ता

  • यह आक्सीजन के सांद्रता को नियंत्रित करता है । यह बहुत से इन्जाइमों के निर्माण में धातु सक्रिय कारक के रूप् में काम करता है ।
  • यह हार्मोन के निर्माण में योगदान देता है ।
  • यह पत्तियों के क्लोरोफिल निर्माण में मदद करता है । इसकी कमी से पत्तियों में क्लोरोफिल की कमी हो जाती है तथा पत्तियां कत्थई रंग की हो जाती हैं जिसे धान का खैरा रोग कहते हैं । वास्तव में यह रोग नहीं बल्कि जिंक की कमी का कारण होता है
  • ठसकी कमी से कलियां गिर जाती हैं साथ ही साथ इसकी कमी से फूल एवं फल कम बनते हैं |

लोहा

  • यह पर्णहरित का अंग नहीं है फिर भी इसके निर्माण में मदद करता है ।
  • इसकी कमी से प्रकाश संशलेषण क्रिया में कमी आ जाती है, क्योंकि यह साइटाक्रोम का अंग है, जो आक्सीकरण में मदद करता है ।
  • यह दलहनी पौधों की जड़ों के होमोग्लोबिन में रहता है । अतः यह नत्रजन स्थीकरण में मदद करता है ।
  • यह क्लोरोफ्लि में प्रोटीन का निर्माण करता है ।

मैगनीज

  • यह क्लोरोफ्लि के निर्माण में मदद करता है ।
  • यह अनेक इन्जाइमों के लिए उत्प्रेरक का काम करता है ।
  • यह डी – हाइड्रोजनीकरण आक्सीडेटीव तथा अनाक्सीडेटीव डी कार्बोआक्सीलेशन तथा नाइट्रोजन एवं लोह की जैविक क्रियाओं को प्रभावित करता है ।
  • यह पौधों में एस्कार्बिक अम्ल बनाने में उत्प्रेरक का काम करता है ।
  • यह नाइट्रोजन यौगिक बनाने में मदद करता है ।
  • यह प्रकाश संशलेषण तथा नत्रजन उपाचन में मदद करता है ।
  • यह इन्जाईमों को जो कैलबिन साईकिल में भाग लेते हैं, को उत्प्रेरित करता है जिससे क्लोरोफिल निर्माण तथा क्लोरोप्लास्ट के निर्माण में मदद मिलती है ।
  • यह कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन तथा वसा निर्माण में मदद करता है ।
  • यह स्टार्च के स्थानान्तरण में भी मदद करता है ।

मोलिब्डेनम

  • फूल गोभी में हीपटेल मुख्यतः मोबिलब्डेनम की कमी से होता है ।
  • यह वायुमण्डल से सहजीवि या असहजीवी दोनों हालत में नत्रजन स्थरीकरण में मदद करता है ।
  • यह इन्जाइमों के इलेक्ट्रान बाहन में मदद करता है ।
  • एस्कार्बिक एसिड आक्सीडेज इन्जाइमों के क्रियाशीलता के बढ़ाने में मदद करता है ।
  • नाइट्रेट रिडक्टेड एवं जौन्थीन आक्सीडेज इन्जाइमों को क्रियाशील बनाने में विशेष रूप से मदद करता है ।

 

तांबा

  • यह पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया में मदद करता है ।
  • यह इन्जाइमों को भी उत्प्रेरित करता है ।
  • एस्कार्बिक एसिड आॅक्सीजन इन्जाइमों के क्रियाशीलता के बढ़ाने में मदद करता है ।
  • नाइट्रेट रिडक्टेड एवं जौन्थीन आक्सीडेज इन्जाइमों को क्रियाशील बनाने में विशेष रूप से मदद करता है ।
  • यह श्वसन क्रिया को भी कम करता है ।
  • यह इलेक्ट्रोन वाहन का भी काम करता है|

 

 

स्त्रोत –

  • डाॅ. वी.एस. चैहान सीनियर डी.ई.एस. कृषि विज्ञान केन्द्र अंवाला

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