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आनर के कीट एवं रोग प्रबंधन - Kisan Suvidha
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आनर के कीट एवं रोग प्रबंधन

अनार के कीट एवं रोग

आनर के कीट एवं रोग प्रबंधन

अनार के कीट एवं रोग इस प्रकार है:-

1.अनार की तितली

यह अनार का सबसे गम्भीर कीट है। यह फल को नुकसान पहॅूचाती हैं।इसके द्वारा 20-80 प्रतिषत हानि होती है। प्रौढ़ तितली फूलों पर तथा छोटे फलों पर अण्डेदेती है। जिनसे इल्ली निकल कर फलों के अन्दर प्रवेष कर जाती है तथा बीजों को खाती है।प्रकोपित फल सड़ जाते है और असमय झड़ जाते हैं।

नियंत्रण

इसके रोकथाम के लिए वाॅटर पेपर से फलों को लपेट दें। देल्टामैथ्रिन 1⁄40.002 प्रतिषत1⁄2 या कार्बोलिक 50 डब्ल्यु. पी. 1⁄40.2 प्रतिषत1⁄2 का छिड़काव फल लगने केबाद 21 दिन के अंतर से करें। स्पाइनोसेड 1⁄4एस.पी.1⁄2 की 0.5 ग्राम मात्रा या इण्उोक्साकार्व 1⁄414.5 एस.पी.1⁄2 1 मि.ली. मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर प्रथम छिड़काव फूल आते समय तथा द्वितीय छिड़काव 15 दिन बाद करें।

 

2.तना छेदक

इस कीट की इल्लियाँ शाखाओं में छेद बनाकर अन्दर ही अन्दर खाकर खोखलाकरती है। शाखाय में पीली पड़कर सूख जाती है।नियत्रण: कीट के प्रकोप की अवस्था में मुख्य तने के आसपास क्लोरो पाईरीफाॅस 2.5 मि.ली./लीटर पानी $ टंईडेमाॅर्फ  1 मि.ली./लीटर पानी में घोलकर डेचिग करें। अधिक प्रकाप की अवस्था में तने के छेद  में न्यूवान की 2-3 मि.ली. मात्रा छेद म ें डालकर छेद को गीली मिट्टी से बंद कर दें।

 

रोग प्रबंधन

 १.फल सड़न रोग

यह रोग फल तोड़ने के बाद लगता है। इस रोग में गोलाकार काले धब्बे फल एव पुष्पीय डण्ठल पर बन जाते है। फल पर लाल या हल्क भूरे रंग केधब्बे आते है और बाद में पूरा फल सड़ जाता है।

नियंत्रण

डायथेन एम- 45 के 0.25 प्रतिषत घोल का 10-15 दिनो कए अंतराल मर छिड़काव करें तथा फलों को अलग-अलग कागज में लपेट कर पैक करें।

 

२.जीवाणु पत्ती झुलसा

इस रोग में छोटे अनियमित आकार के पनीले धब्बे पत्तियों पर बनजाते हैं। यह धब्बे हल्क्के भूरे से गहरे भूरे रंग के होते है। बाद में फल भी गल जाता है।

नियंत्रण

बोर्डो मिश्रण 1⁄41 प्रतिषत1⁄2 का छिड़काव करें या स्टंेप्टासाइक्लिन 0.2 ग्राम/लीटर $ काॅपर आक्सीक्लोराईड 2.5 ग्राम/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

 

Source-

  • Jawaharlal Nehru Krishi VishwaVidyalaya

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