0
  • No products in the cart.
Top
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रशिक्षण योजना – Kisan Suvidha
3719
post-template-default,single,single-post,postid-3719,single-format-standard,theme-wellspring,mkdf-bmi-calculator-1.0,mkd-core-1.0,woocommerce-no-js,wellspring-ver-1.2.1,mkdf-smooth-scroll,mkdf-smooth-page-transitions,mkdf-ajax,mkdf-blog-installed,mkdf-header-standard,mkdf-sticky-header-on-scroll-down-up,mkdf-default-mobile-header,mkdf-sticky-up-mobile-header,mkdf-dropdown-slide-from-bottom,mkdf-search-dropdown,wpb-js-composer js-comp-ver-4.12,vc_responsive

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रशिक्षण योजना

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रशिक्षण योजना

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को प्रशिक्षण हेतु
मार्गदर्शी निर्देश

कृषि उत्पादन बढ़ाने में प्रशिक्षण एवं भ्रमण की अह्म भूमिका को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2007-08 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों हेतु एक नवीन योजना तैयार की गई है । जिसमें प्रशिक्षण, भ्रमण के माध्यम से इस वर्ग के कृषक को कृषि तकनीकी की व्यवहारिक जानकारी देकर, उनके कृषि उत्पादन को बढ़ाकर जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकेगा ।

योजना का नाम एवं विवरण

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों के जीवनयापन स्तर में सुधार कर उसमें स्थायित्व लाना है। विभाग के सामान्य विस्तार-तंत्र को प्रशिक्षित कर इस वर्ग के कृषकों को विशेष कृषि तकनीकि में प्रशिक्षण देना एवं भ्रमण के माध्यम से तकनीकि हस्तांतरण करने हेतु योग्य बनाना। परियोजना के जिले में इन वर्ग के कृषकों को कम लागत की तकनीकि चुनने, उसे समझने एवं अपनाने योग्य बनाना है ।

योजना का कार्यक्षेत्र

प्रदेश के समस्त अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के 20 जिले बालाघाट,छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, डिण्डोरी, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, धार, झाबुआ, अलिराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, श्योपुरकलां, बैतूल एवं होशंगाबाद तथा शेष अनुसूचित जाति बाहुल्य कृषकों के जिले जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी,बालाघाट, छिंदवाड़ा, सिवनी, सीधी, सिंगरौली, सागर, दमोह,पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सतना, इंदौर, खरगौन, खंडवा, धार, उज्जैन, मंदसौर, देवास, शाजापुर, नीमच, रतलाम, मुरैना, भिण्ड, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, श्योपुर, भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, बैतूल, होशंगाबाद तथा हरदा में इस प्रकार योजना का जिलों में अलग-अलग प्रशिक्षणों हेतु कार्यक्षेत्र होगा।

प्रशासनिक व्यवस्था

इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये जिले के उप संचालक कृषि/प्राचार्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केन्द्र के कार्यालय में पदस्थ एक सहायक संचालक कृषि जो आत्मा योजना का नोडल अधिकारी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों के प्रशिक्षण हेतु योजना का कार्य जिले मे पदस्थ अनुविभागीय कृषि अधिकारी, विषय वस्तुविशेषज्ञ, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी करेगें।

 योजना के मुख्य घटक

योजना के प्रमुख घटक भूमिहीन कृषक प्रशिक्षण, कृषक मित्र, किसान दीदी प्रशिक्षण, राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर कृषक भ्रमण, महिला कृषक प्रशिक्षण, सेमीनार, वर्कशाप, इंटरफेस, कृषक प्रशिक्षण तथा कृषि मेले का आयोजन हैं।

 वित्तीय व्यवस्था

1. संचालक कृषि जिले के उप संचालक कृषि/प्राचार्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केन्द्र को कार्यक्रम क्रियान्वयन के लिये भौतिक लक्ष्यों की पूर्ति|

2. प्रत्येक घटक में वित्तीय प्रावधान की सीमा तक जिला स्तर पर भौतिक लक्ष्य उपलब्ध आवंटन के आधार पर परिवर्तित किये जा सकते है।
3. बजट मांग संख्या 41 विशेष रूप से अनुसूचित जन जाति हितग्राहियों के 20 जिलों में एवं मांग संख्या 64-विशेष रूप से अनुसूचित जाति बाहुल्य जिलों में व्यय की जावे।

लक्ष्यों का निर्धारण

1. संचालक कृषि योजना के प्रावधान अनुसार जिले के उप संचालक कृषि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कृषकों की संख्या को ध्यान मे रखकर जिले के लिए भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करेगें।
2. उप संचालक कृषि/प्राचार्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केन्द्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कृषकों की संख्या के आधार पर विकासखण्डवार लक्ष्यों का विभाजन कर अनुविभागीय कृषि अधिकारी एवं विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को सूचना देंगे।
3. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी प्राप्त लक्ष्यों का विभाजन ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारीवार करेंगे तथा इसकी सूचना क्षेत्रीय कृषि विकासअधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को दी जावेगी।

घटक

1. भूमिहीन कृषक प्रशिक्षण

कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा अन्य स्त्रोतों से आय अर्जित करने हेतु इन कृषकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किये जावेंगे एवं कृषकों को स्वसहायता समूह बनाने हेतु प्रेरित किया जायेगा। स्वसहायता समूह के माध्यम से कृषि से
जुड़े व्यवसाय, अन्य लघु उद्योग डेरी, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन,सब्जी उत्पादन कर आर्थिक स्तर पर सुदृढ़ हो सकेेंगे। कार्यक्रम में विषयों का निर्धारण उप संचालक कृषि/ प्राचार्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केन्द्र स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर निर्धारण कर प्रशिक्षण को उपयोगी और परिणामदायी बनावेंगे ।

प्रशिक्षणार्थियों का चयन निम्नानुसार किया जावेगा –

  • भूमिहीन प्रशिक्षणार्थियों का चयन ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारीजो प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु इच्छुक होंगे उनका आवेदन प्राप्त करवरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से उप संचालक कृषि को भेजे जावेंगे।
  •  प्रत्येक जिले के उप संचालक कृषि उनके कार्यालय इच्छुक अभ्यार्थियों की सूची उनके द्वारा जिस दिनांक को आवेदन भर कर प्राप्त किया गया है, आधार मान कर प्राथमिकता क्रम में संधारित की जावेगी ।
  •  अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति दौनों की सूची अलग-अलग संधारित की जावेगी ।
  • भूमिहीन कृषकों को सहायता समूह बनाने हेतु प्रेरित किया जावेगा । इस कार्य में प्रत्येक ग्राम के किसान मित्र की अहम भूमिका रहेगी । इस प्रकार गठित समूह एक साथ आवेदन भर सकेंगे एवं ऐसे समूहों को प्रशिक्षण हेतु नामांकन करने में प्राथमिकता दी जावेगी ।
  •  संधारित पंजी के अभ्यार्थियों को उनके क्रम में प्रशिक्षण हेतु नामांकित किया जावेगा ।
  • अनुसूचित जनजाति का प्रशिक्षण 89 विकासखण्डों में ही आयोजित किये जावेंगे ।

 

2.  किसान मित्र एवं किसान दीदी प्रशिक्षण

म.प्र. शासन कृषि विभाग के पत्र क्र0 बी-6/2/07/14-2 दिनांक 15.1.07 द्वारा प्रदेश के सभी राजस्व ग्रामों से एक कृषक मित्र एवं किसान दीदी का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाना है ताकि वे विभाग एवं कृषकों के बीच एक सेतु का कार्य कर सकें । प्रदेश के सभी अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के किसान मित्र एवंकिसान दीदी को इस योजना में प्राथमिकता के आधार पर विधिवत प्रशिक्षित किया जावे।

3. राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर कृषक भ्रमण

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को नवीनतम तकनीक की जानकारी देने हेतु प्रदेश के अंदर एवं प्रदेश के बाहर चल रहे अनुसंधान एवं अन्य विकास कार्यों का अवलोकन करवाया जाकर उनका ज्ञानवर्धन किया जावे। भ्रमण हेतु प्रशिक्षण व्यवस्था के आदेश क्रमांक-7 का पालन सुनिश्चित किया जावे। कृषकों का चयन निर्धारित प्रक्रिया अनुसार उप संचालक कृषि विधिवत कार्यक्रम तैयार कर करेंगे। उप संचालक कृषि यह सुनिश्चित करेंगे कि भ्रमण स्थलों पर कृषकों को ठहरने, भोजन व्यवस्था एवं भ्रमण करवाने वाले अधिकारियों से भ्रमण पूर्व सम्पूर्ण कार्यक्रम पर चर्चा/ पत्र व्यवहार कर लें जिससे कृषकों को कहीं असुविधा न हो । प्रत्येक भ्रमण सम्पन्न होने पर इसका उल्लेख जिले के मासिक प्रगति प्रतिवेदन में किया जावेगा ।

4. महिला कृषक प्रशिक्षण

तकनीकी प्रशिक्षण में प्रशिक्षित, समान रूचि और समान आवश्यकता वाली कृषक महिलाओं को, कृषि कार्य से जुड़े, अतिरिक्त आय के साधन जुटाने के लिये/ अवसर प्रदान करने के लिये विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किये जावेंगे जिसमें विषय विशेषज्ञ/जानकार उस विषय पर विस्तृत चर्चा कर प्रशिक्षण दिया जावेगा। महिला कृषक प्रशिक्षण तीन दिवसीय होंगे। प्रशिक्षण में विषयों का चयन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित किया जावे।

5. प्रचार सामग्री का विकास एवं साहित्य

प्रिटिंग मटेरियल/ इलेक्ट्रानिक सामग्री तैयार करने/ क्रय करने की कार्यवाही उप संचालक कृषि/प्राचार्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केन्द्र को उपलब्ध करावें। प्रशिक्षणों को व्यवहारिक एवं उपयोगी बनाने हेतु छायाचित्रों, एल.सी.डी. का उपयोग व सामग्री बनाकर
भी दिखाई जावे।

6. सेमीनार/वर्कशाप

प्रौद्यौगिकी के प्रभावी हस्तांतरण तथा मैदानी समस्याओं पर सेमीनार/ कार्यशाला, संचालक कृषि/ संचालक विस्तार सेवाऐं/ कृषि विश्वविद्यालय के समन्वय से आयोजित की जावे। पूर्व में संभाग / जिला स्तर पर सेमीनार/ वर्कशाप आयोजित किये जाने हेतु कमिनश्नर एवं कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर सेमीनार का आयोजन किया जाता था। उसी आधार पर सेमीनार का आयोजन किया जावेगा ।

7. कृषक प्रशिक्षण

उप संचालक कृषि/प्राचार्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केन्द्र विभाग के प्रत्येक कृषि जलवायु क्षेत्र में आवश्यकता के अनुरूप कृषकों को
तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित करेंगे । सामान्यतः एक प्रशिक्षण खरीफ एवं एक रबी सीजन में आयोजित करें । प्रशिक्षण व्यवहारिक एवं प्रायोगिक हों।प्रशिक्षण के दौरान भ्रमण भी कराया जावे ।

8.कृषि मेले

कार्यक्रम के अंतर्गत जिला/विकासखंड स्तर पर मेले का आयोजन किया जावे। प्रत्येक प्रदर्शनी मेले हेतु राशि रू0 30,000/- एवं कृषक सम्मेलन हेतु 10,000/- राशि व्यय कर सकेंगे । म.प्र. शासन के आदेश क्रमांक-8 के बिन्दु क्रमांक-9 के अनुसार कार्यवाही की जावेगी ।

9.इंटरफेस

उप संचालक कृषि प्रत्येक फसल सीजन की समाप्ति के पश्चात तथा आगामी फसल सीजन के लिए इंटरफेस आयोजित करेंगे|इंटरफेस स्थानीय वरिष्ठ वैज्ञानिकों की सहमति से करेंगे। इंटरफेस आयोजन म.प्र. शासन के आदेश क्रमांक-8 के बिन्दु क्रमांक-9 के अनुसार किया जावेगा ।

10 .भवन निर्माण/उपकरण एवं मशीनरी

राज्य में कार्यरत विभागीय विकासखंड स्तरीय प्रशिक्षण भवनों, कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केन्द्रों के पुराने भवनों की मरम्मत तथा उपकरण एवं मशीनरी से सुसज्जित किया जावे। इस हेतु प्रस्ताव तकनीकी स्वीकृति प्राप्त कर विधिवत संचालनालय को भेजे जावें।

क्रियान्वयन

प्रत्येक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र के 5 से 10 ग्रामों में से प्रशिक्षणों के लिए रूचि रखने वाले 25 भूमिहीन कृषकों का चयन क्षेत्रीय कृषि विकास अधिकारी के परामर्श करके सूची वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को उपलब्ध कराएँगे,वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सूची का संकलन कर, सूची उप संचालक कृषि को प्रस्तुत करेंगे उप संचालक कृषि सूची अनुसार 30 कृषकों को प्रशिक्षण हेतु प्राचार्य प्रशिक्षण केन्द्र में भेजेंगे ।

1. किसान दीदी/किसान मित्र –

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी राजस्व ग्रामों से एक चयनित किसान मित्र एवं किसान दीदी की सूची वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी को उपलब्ध करायेगें । वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सूची को संधारित करेंगे एवं सूची को उप संचालक कृषि को भेजेंगे एवं उप संचालक कृषि की सहमति के आधार पर ग्रामों के क्लस्टर बनाकर प्रशिक्षणों का आयोजन करेंगे ।

2. महिला कृषक प्रशिक्षण –

क्रियान्वयन हेतु ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में से 2 से 5 ग्रामों से प्रशिक्षण में रूचि रखने वाले एवं कृषि कार्य में जुटे महिला कृषकों की सूची वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को उपलब्ध करायेंगे । वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सूची उप संचालक कृषि से अनुमोदित करवायेंगे । विकासखण्डवार महिला कृषकों का उप संचालक कृषि से अनुमोदन उपरांत चयनित महिला कृषकों को प्रशिक्षण केन्द्रों में विकासखण्डवार प्रशिक्षण आयोजित करेंगे ।

3. राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर कृषक भ्रमण –

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के मार्गदर्शनानुसार कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर भ्रमण हेतु कृषकों का चयन करेंगे कृषक का साक्षर होना एवं कम उम्र का होना उपयोगी होगा, चयनित किसान दीदी तथा किसान मित्र एवं सक्रिय समूह के सदस्य को प्राथमिकता देगें एवं सूची अनुमोदन हेतु वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से उप संचालक कृषि को भेजेंगे।

4. कृषक प्रशिक्षण –

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी के सहयोग से लघु सीमांत कृषकों का चयन करके वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को सूची उपलब्ध करायेंगे । वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सूची को उप संचालक कृषि से अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करेंगे । उप संचालक कृषि के अनुमोदन उपरांत कृषकों को प्रशिक्षण हेतु प्रशिक्षण केन्द्र में भेजेंगे ।

5 कृषि मेला –

कृषि मेलों का आयोजन उप संचालक कृषि के द्वारा जिला/ विकासखण्ड स्तर पर कार्यक्रम तैयार कर मेले का आयोजन करावेंगे ।

6 इंटरफेस –

उप संचालक कृषि प्रत्येक फसल सीजन की समाप्ति के पश्चात तथा आगामी फसल सीजन के लिए इंटरफेस आयोजित करेंगे । इंटरफेस वरिष्ठ वैज्ञानिक की सहमति से करेंगे ।

7. प्रशिक्षण –

राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (स्वशासी) के पत्र क्र./सियेट/प्रशिक्षण/01-1/मापदंड/09-10/510 भोपाल दि. 01.08.2009 द्वारा संशोधित कोर्स फीस के अनुसार प्रशिक्षण कराया जावेगा।
Source-

  • mp.gov.in

Comment

Sorry, the comment form is closed at this time.