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अनाज भण्डारण की आवश्यक जानकारी - Kisan Suvidha
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अनाज भण्डारण की आवश्यक जानकारी

अनाज भण्डारण

अनाज भण्डारण की आवश्यक जानकारी

कृषि जगत में महिलाओं की भूमिका से सभी परिचित हैं । फसल उत्पादन से लेकर भण्डारण एवं उपयोग तक महिलाएं प्रत्येक कार्य से सीधे जुड़ी हुई हैं । अध्ययनों से पता चलता है कि भूमि की तैयारी से लेकर अन्न भण्डारण तक महिलाएं कृषि में सक्रिय भूमिका निभाती हैं । अन्न भण्डारण का काम 95 प्रतिशत तक महिलाओं द्वारा ही किया जाता है , अतः महिलाओं को इसकी वैज्ञानिक जानकरी होने से अन्न खराब होने से बच जाएगा ।
देश मेें पैदा होने वाले अन्न का 10-12 प्रतिशत केवल अनुचित रख रखाव के कारण नष्ट हो जाता है, अतः यह वैज्ञानिक तौर पर आवश्यक है कि किसान की कड़ी मेहनत की कमाई अनुचित रख रखाव से खराब न हो । उचित रखरखाव की जानकारी व सावधानी हेतु हमें निम्नलिखित बातों को अपनाना चाहिए ।

 

सुरक्षित अन्न भण्डारण के लाभ

  • सुरक्षित अन्न भण्डारण से किसान को पैदावार का पूरा लाभ मिलता है ।
  • उचित प्रकार से अन्न भण्डारण करने पर किसान अपना बीज स्वयं तैयार कर सकता है इस प्रकार उसे आर्थिक लाभ भी होगा ।
  • सुरक्षित अन्न भण्डारण करने से परिवार के लिए स्वच्छ व गुणवत्तायुक्त अनाज उपलब्ध होता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है । कीड़ा लगा अनाज कई प्रकार की बीमारियाँ फैलाता है जैसे त्वचा से संबंधित एलर्जी, अपच एवं अतिसार यानि स्वाद व स्वास्थ्य दोनों खराब ।
  • यदि किसान अपने उत्पादन को मंडी में बेचना चाहता है तो स्वस्थ फसल का भाव भी उसे अच्छा मिलता है ।
  • अनाज में कीड़ों का प्रकोप हो जाने से महिलाओं का कार्य बहुत बढ़ जाता है । अन्न को साफ करने में कीड़ों से बचाने में महिलाओं को अन्य आवश्यक कार्यों को छोड़ कर इस कार्य में लगना पड़ता है और दुगुना श्रम करने को बाध्य होती हैं ।

अतः यह आवश्यक है कि सुरक्षित अन्न भण्डारण का तरीका अपनाया जाए ।

 

अनाज में संक्रमण होने के कारण

अनाज में संक्रमण व खराब होने के चार मुख्य कारण होते हैं:

नमी, कीट, चूहे और भण्डारण के पात्र या बोरे ।

१. नमी

अनाज के अन्दर की नमी और वातावरण की नमी दोनों की अधिकता अनाज को खराब कर सकती है । ज्यादा नमी होने से अनाज में कीड़ों का प्रकोप अधिक होता है क्योंकि नमी में कीट और फफूंद की वृद्धि आसान होती है । नमी से अनाज गल या सड़ जाता है या अंकुरित हो जाता है । नमी के कारण अनाज के दाने जुड़ भी सकते हैं । इन सब कारणों से अनाज की गुणवत्ता नष्ट हो जाती है और सवंमित अनाज खाने योग्य नहीं रहता है ।

२.कीट

अनाज पर पलने वाले कीट खेत में ही अनाज के दानों पर अंडे देना शुरू कर देते हैं । कुछ समय बाद इन अण्डों से लट या इल्ली निकलकर अनाज को खाने लगती है । कीड़े अनाज के भंडार में अनाज के साथ रहने लगते हैं और अनाज को धीरे-धीरे अन्दर बाहर से खाकर खोखला कर देते हैं । ऐसा अनाज बोने और खाने लायक नहीं रहता है । अतः अनाज की कटाई से पहले ही सावधानियाँ रखनी शुरू कर देनी चाहिए ।

३.चूहे

चूहे मनुष्य के स्वास्थ और खाद्य सामग्री को काफी नुकसान पहुँचाते हैं । ये खड़ी फसल और भंडारित अनाज को जितना खाते हैं उससे दस गुना बर्बाद करते हैं । चूहों के मल, मूत्र व बाल अनाज में मिल जाने से अनाज खराब हो जाता है । अतः चूहा नियंत्रण अन्न भण्डारण का एक महत्वपूर्ण भाग हैं । मरूस्थल में चूहों की संख्या ज्यादा है एक अनुमान के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में औसतन 100 चूहे प्रति हैक्टेयर पाये जाते हैं । बीकानेर का देशनोक तो विश्व में चूहों के कारण प्रसिद्ध है ।

४.भण्डारण के पात्र व बोरे

यदि भण्डारण में प्रयोग होने वाले पात्रों में दरारें हैं तो उनमें कीड़े अन्डे दे देते हैं जिससे नये कीड़ों का प्रकोप हो जाता है । यदि पुराने बोरों को प्रयोग किया जाता है उसमें भी कीड़े या उनके अंड़े हो सकते हैं ।

 

अनाज में लगने वाले मुख्य कीट

अनाज मेें लगने वाले चार मुख्य कीट हैं चावल का घुन, गेहूँ का खपरा, दालों का भृंग, आटे की सूंडी ।

क्रमांक संख्या कीट का नाम अनाज
1. चावल का घुन चावल, गेहूं, मक्का, जौ, ज्वार आदि |
2. गेहूं का खपरा गेहूं, चावल, ज्वार,बाजरा, मक्का आदि |
3. दालों का भृंग अरहर, मूंग, उरद, चना, मटर, मोठ, चावल आदि |
4. आटे की सूंडी गेहूं, मक्का, चावल, जौ, ज्वार, आटा, सूजी, मैदा आदि |

 

अनाजों का सुरक्षित भण्डारण

अन्न भण्डारण से होने वाले लाभ को देखते हुए सुरक्षित अन्न भण्डारण एक उपयोगी जानकारी व अपनाने की विधि है ।

1.अनाज की सफाई

अनाज की कटाई के साथ ही उसके उचित भण्डारण की तैयारी शुरू हो जाती है । बाजरा, गेहूँ, मक्का, ज्वार आदि के सिट्टे और बालियाँ जिस बोरे में भर कर रखने हों उस बोरे को पहले से ही एक प्रतिशत मैलाथियाॅन के घोल में 10 मिनट भिगो कर अच्छी तरह सुखाएं । तेज धूप में 5-6 घंटे सुखाने पर कीड़ों का प्रकोप बहुत कम हो जाता है । काटे हुए अनाज को सीधे जमीन पर न रखें, इससे कीड़े और नमी दोनों से अनाज प्रभावित होगा । अनाज लाने वाली गाड़ी, टैक्टर ट्रोली को अनाज रखने से पहले धो कर सुखा लेना चााहिए । सुखाते समय प्लास्टिक का मोम जाता काम में लें जो कि भली भांति कीटनाशक से उपचारित होना चाहिए ।

भण्डारण से पहले अनाज को साफ करें उसमें से भूसी, कटा फटा अनाज, सवंमित अनाज, कंकर आदि निकाल दें । अनाज को करीब 15-20 दिन सुखाना आवश्यक है । सूखने की पहचान होती है कि यदि दाने को दांत के बीच में रख कर काटा जाए तो कट की आवाज आए । सूखे हुए अनाज को शाम के समय कोठी में न भरें । सूखे अनाज को पूरी रात खुली हवा में ठन्डा होने दें और सुबह उसे कोठी में भरें । इस प्रकार सूखे अनाज में 3-4 प्रतिशत नमी रह जाती है ।

 

2.कोठी, भण्डारण गृह की सफाई

भंडारगृह में छत, फर्श, खिड़कियाँ एवं दरवाजे प्रमुख होते हैं । फर्श में कहीं पर भी दरारें हो तो उन्हें सीमेन्ट से भर देना चाहिए, जहाँ पर फर्श और दीवारें मिलते हैं उस जगह पर भी अच्छी तरह, भराई करनी चाहिए । दीवारें आदि सीमेन्ट की हो तो उत्तम होगा । दीवारों में दरारें, पपड़ी आदि नहीं होनी चाहिए, भण्डारण के दस दिन पूर्व कमरे में 0.5 प्रतिशत मैलाथियाॅन का घोल बनाकर 3 लीटर प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से गोदाम में छिड़काव करना चाहिए । उसके बाद गोदाम को अच्छी तरह सूखने देना चाहिए । दरवाजों के नीचे की तरफ लोहे या एल्यूमिनियम की पत्तियां लगा देनी चाहिए तकि चूहों से बचाव हो सके । जहाँ तक संभव हो एक पल्ले का दरवाजा रखें । खिड़कियाँ बाहर खुलने वाली हों और ऊँचाई पर हों । सिड़कियों पर महीन जाली होनी चाहिए ।

 

3.बोरे की सफाई

अनाज को जूट के बोरों या कट्टों में भी संग्रह कर सकते हैं, जहाँ तक संभव हो नये बोरों का प्रयोग करें, अगर बोरे पुराने हैं तो उन्हें 1 प्रतिशत मैलाथियाॅन के घोल में आधे घंटे भिगोंए और कड़ी धूप में 2-3 दिन तक उलट पलट कर सुखा लें । यह काम गर्मी के मौसम में कर लें तो अच्छा रहेगा । यदि बोरे कहीं से फटे हैं, तो उन्हें सिला लें । अनाज भरने के बाद बोरे का मुंह अच्छी तरह सिल दें ।

 

4.चूहा नियंत्रण

चूहा नियंत्रण पूरे घर व आसपास के क्षेत्र में मई व जून माह मे करना चाहिए । इस समय खेत में अन्य कोई खाद्य नहीं होता है । इसलिए चूहा विष चुग्गा आसानी से खा लेता है । चूहों को नियंत्रित करने के लिए 2-3 प्रतिशत जिंक फाॅस्फाइड उपयुक्त माना गया है । विष चुग्गा देने से पूर्व 2-3 दिन तक बिना जहर वाला चुग्गा चूहों को देना चाहिए ताकि चूहों की नयी वस्तु स्वीकार करने की शंकालु आदत कम की जा सके । विष चुग्गा बनाने के लिए बाजरा या किसी अन्य अनाज में हल्का सा मूंगफली का तेल लगा लें । इसके बाद एक किलो बाजरी में 20-30 ग्राम जिंक फाॅस्फाइड पाउडर डाल कर एक लकड़ी से अच्छी तरह हिला लें ।

चुग्गा बनाते समय बच्चों को दूर रखें व बनाने वाला व्यक्ति अपना मुंह रूमाल से बांध ले । अब इस चुग्गे को खेत में एक्टिव अर्थात उन बिलों में डालें जहां चूहों की आवाजाही हो । भंडारघरों में दीवार के किनारे-किनारे डाल दें । अगले दिन सुबह बचे हुए अन्न के दानों को अच्छी तरह इक्ट्ठा कर के नष्ट कर दें । आवासीय जगहों के लिए एन्टी कोअगुलेंट क्रन्तक नियंत्रण दवाईयां जो कम जहरीली हैं जैसे ब्रोमोडायोलोन का प्रयोग किया जाता है यह कार्य विषेशज्ञ की सहायता से ही करना चाहिए ।

 

कीट नियंत्रण

कीट नियंत्रण दो स्तर पर किया जाता है । बचाव के लिए और कीटों का प्रकोप होने के बाद । बचाव कीट नियंत्रण की मुचय आवश्यकता है ।

  •  ई.डी.बी. एम्पयूल 30 मिली प्रति मीट्रिक टन अनाज के लिए ।
  •  सेल्फोस (एल्यूमिनीयम फाॅस्फाईड) की 3 ग्राम की एक गोली प्रति मीट्रिक टन अनाज के लिए डालें या सात गोली (2 ग्रा.) प्रति 22 घनमीटर स्थान की दर से कमरे को ध्रूमण करने के लिए डालेें ।

कीटों का आक्रमण कर देने के बाद 3 मिली. की 1 ई.डी.बी. एम्पूल प्रति क्विंटल अनाज की दर से कोठी में डालें । ई.डी.बी. को कभी खुले में न डालें यह जान लेवा हो सकता है ।

 

भण्डारण

अनाज से भरे बोरे फर्श पर सीधे न रखें । पहले कोई लकड़ी के फट्टे इस प्रकार रखें कि थोड़ी लकड़ी बाहर की तरफ निकली रहें । बोरों को दीवार से एक से डेढ़ फिट दूर रखें । बोरों को एक ही दिशा में न रखें एक के ऊपर एक रखने के लिए एक बोरा लम्बवत रखें और दूसरा बोरा ऊध्र्ववत रखें अर्थात प्लस का निशान बनाते हुए एक के ऊपर दूसरा रखें इससे बोरों के बीच में हवा आराम से जाएगी । ज्यादा ऊँची थड़ियाँ न लगाएं छत से दो फीट नीचं थड़ियाँ समाप्त कर दें । यदि कोठी में अनाज भर रहे हैं तो उपचारित कोठी में अनाज भरकर ढक्कन बन्द करके वायु रोधक लेप (मिट्टी, मोम) लगा दें ।

अनाज जिस कमरे में रखा हो उसमें घरेलू सामान रखना, उठाना, सोना, खाना आदि न करें । इस प्रकार वैज्ञानिक विधि से भण्डारण करने पर अन्न सुरक्षा से उपज का पूरा लाभ मिलेगा । किसी भी प्रकार के विष का उपयोग अत्यंत सावधनी से और विशेष देख रेख में करना चाहिए या किया जाना चाहिए । विष के पैकेट पर लिखे निर्देशों का भली भांति पालन करें ।

 

परम्परागत तकनीकी ज्ञान

कुछ परम्परागत तकनीकी ज्ञान भी अन्न भण्डारण में बहुत उपयोगी होता है । जैसे अनाज व दालों के कड़वा तेल लगाना, राख मिलाना, नीम व करंज के पत्ते कोठी में बिछाना आदि । अनुसंधानों द्वारा यह पाया गया है कि परम्परागत तरीके से अनाज व दालों में 10-20 प्रतिशत तक राख (बानी) मिलाने से वो खराव नहीं होते पर आवश्यक है कि राख को छान व सुखा कर ही डाला जाए । राख की रगड़ खाकर कीड़े मर जाते हैं और दानों के बीच की जगह जहाँ हवा हो सकती है वहां राख आ जाने से हवा नहीं रहती । इस प्रकार राख मिलाना लाभप्रद होता है ।

 

स्रोत-

  • केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), जोधपुर 342003, राजस्थान

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