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अनन्नास में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण एवं निदान – Kisan Suvidha
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अनन्नास में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण एवं निदान

अनन्नास में पोषक तत्व

अनन्नास में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण एवं निदान

अनन्नास के फलों के भरपूर उत्पादन एवं गुणवत्ता के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व अत्यंत ही उपयोगी होते है। अनन्नास के पौधों पर सूक्ष्म पोषक तत्व अत्यंत ही उपयोगी होते है। अनन्नास के पौधों पर सूक्ष्म तत्वों के कमी लक्षण एवं उसके उपचार के जानकारी निम्नलिखित है-

मैंगनीज

इस तत्त्व की कमी से अनन्नास के पौधे हल्के पीले दिखाई देते हैं तथा पत्तियों की बढ़वार रुक जाती है और पौधों का पूर्ण विकास नहीं होता। फलों की वृद्धि पर भी मैंगनीज की कमी का कुप्रभाव पड़ता है। मैंगनीज की कमी से पौधों की संवर्धन क्रिया (सकर एवं स्लिप पैदा करना) भी प्रभावित होती है। इसकी पूर्ति के लिए 0.4 प्रतिशत (4 ग्रा./ली.) मैंगनीज सल्फेट का 15 दिनों के अंतर पर दो से तीन बाद छिड़काव करना चाहिए।

बोरॉन

बोरॉन की कमी से पौधों की फलोत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है एवं फल का वजन एवं आकार दोनों में ही असामान्य रूप से कम हो जाते हैं तथा फल फट जाते हैं। पौधों में सकर उत्पादन में कमी आती है। मुख्य जड़ें भूरी हो जाती हैं तथा सिरों पर सड़ जाती हैं। इसकी कमी के कारण पौधों में पोषक जड़ें कम बनती हैं। इसके निदान के लिए 8 से 10 कि.ग्रा. बोरेक्स प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि में प्रयोग करना चाहिए अथवा फसल पर 0.3 से 0.5 प्रतिशत (3 से 5 ग्रा./ली.) बोरेक्स का छिड़काव 2 से 3 बार करना चाहिए।

ताँबा

अनन्नास पर इन दोनों तत्वों की कमी के लक्षण लगभग एक समान दिखाई देते हैं। सबसे पहले मध्य क्रम की पत्तियाँ मुड़ने लगती हैं। जिन पत्तियों का बाद में विकास होता है वे विशेष रूप से पहले हल्के हरे से पीले रंग की हो जाती है और इन पर मोम जैसी एक मोटी परत बन जाती है। ताँबे एवं जस्ते की अत्यंत कमी होने से पौधों के बीच में पत्तियों का गुच्छा बन जाता है और वे झुक जाती हैं। इनकी पूर्ति के लिए 0.4 प्रतिशत (4 ग्रा./ली.) कॉपर सल्फेट का घोल तथा 0.5 प्रतिशत (5 ग्रा./ली.) जिंक सल्फेट का घोल 2 से 3 बार फसल में छिड़कें।

लोहा

लोहे की कमी के कारण पत्तियों में हल्के हरे रंग के साथ-साथ कुछ लालिमा आ जाती है। प्राय: लोहे की कमी के लक्षण नए पत्तों पर दिखना प्रारम्भ होते हैं। फल अपरिपक्व अवस्था में पकने लगते हैं। जिन क्षेत्रों में मिट्टी का पी-एच मान 8 से अधिक होता है वहाँ सामान्यत: लोहे की कमी देखी जाती है। इसकी पूर्ति के लिए लोहे के किलेट का प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त 0.4 से 0.8 प्रतिशत (4 से 8 ग्रा./ली.) फेरस सल्फेट के 2 से 3 छिड़काव से भी पीलापन दूर किया जा सकता है।

 

 

Source-

  • hi.vikaspedia.in

 

Comment

  • Bablofil
    11/06/2017 at 5:43 PM

    Thanks, great article.

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