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सोयाबीन कृषको के लिए उपयोगी सलाह / Advisory for Soybean farmers (13-19 Aug 2018) - Kisan Suvidha
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सोयाबीन कृषको के लिए उपयोगी सलाह / Advisory for Soybean farmers (13-19 Aug 2018)

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सोयाबीन कृषको के लिए उपयोगी सलाह / Advisory for Soybean farmers (13-19 Aug 2018)

सोयाबीन कृषको के लिए उपयोगी सलाह / Advisory for Soybean farmers

मौसम विभाग से अगले सप्ताह के लिए प्राप्त आंकड़ो एवं कीट प्रकोप के विष्लेषण के आधार पर निम्नलिखित कीटों का विभिन्न जिलों  में अधिक प्रकोप होना संभावित है, जिनका समुचित एवं समय से नियंत्रण करना आवश्यक होगाः-

कीट राज्य जिला
गडर्ल बीटल मध्य प्रदेश छिंदवाडा, दमोह, धार, खंडवा, रायसेन
महाराष्ट्र कोल्हापुर
हेलियोथिस आर्मिजेरा
(चने की इल्ली)
मध्य प्रदेश भोपाल, धार, छिंदवाडा
स्पोडोप्टेरा लिटुरा
(तम्बाखू की इल्ली)
मध्य प्रदेश बैतूल, छिंदवाडा, दमोह, धार, खंडवा, रायसेन, सिवनी,
शाजापुर, उज्जैन, सागर
महाराष्ट्र अमरावती, कोल्हापुर, यवतमाल, वाशिम

2. कुछ क्षेत्रो में चने की इल्ली एवं तम्बाखू की इल्ली का प्रकोप शुरू होने का समाचार प्राप्त  हुआ है। इनके नियंत्रण हेतु अलीका (थायोमिथाक्सम + लेम्बडा सायहेलोथ्रीन) 125 मि.ली./हे. की दर से 500 लीटर पानी के साथ छिडकाव करें।

3. जिन स्थानों पर सोयाबीन की फसल पर व्हाइट ग्रब (सफेद सूंडी) का प्रकोप देखने में आ रहा हैवहां निम्न उपाय करें – इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 300 मि.ली./हे. अथवा जैविक कीटनाशक ब्यूवेरिया बेसिआना/मेटाराइझियम एनाइसोप्ली 1 किलो/है. अथवा क्लोरपाइरीफॉस 10 जी 20 किलो/है. की दर से उपयोग करें।

4. जिन स्थानों पर गडर्ल बीटल का प्रकोप शुरू हो गया हो वहां पर थाइक्लोप्रीड 21.7 एस.सी. 650 मि.ली./है. अथवा ट्रायझोफॉस 40 ई.सी. 800 मि.ली./. की दर से छिड़काव करें।

5. फसल की सतत् निगरानी करते  हुए तम्बाखू की इल्ली अथवा बिहार की रोएदार इल्ली के समूह द्वारा ग्रसित पत्तियो/पौधों को पहचानकर नष्ट करें।

6. पत्ती खाने वाली इल्लियों के लिए पूव र् मिश्रित कीटनाषक बीटासायफ्लूथ्रीन + इमिडाक्लोप्रीड 350 मि.ली. अथवा थायमिथॉक्सम + लेम्बडा सायहेलोथ्रीन 125 मि.ली/है. की दर से छिड़काव करें। इस उपाय से तना मक्खी एवं रस चूसने वाले कीट जैसे सफेद मक्खी का भी नियंत्रण होगा।

7. पीला मोजाइक बीमारी को फैलाने वाली सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए खेत में यलो स्टीकी ट्रैप का प्रयोग करें जिससे मक्खी के वयस्क नष्ट किये जा सके। पीला मोजाइक रोग से ग्रसित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें। इससे रोग को फैलने से रोकने में सहायता होगी।

8. जिन क्षेत्रों में अधिक वर्षा हो रही है वहां पर सोयाबीन के खेत में जलभराव ना होने दें।

9. जिन स्थानों पर पिछले कई दिनां से वर्षा नही हुई है एवं तापमान थोडा अधिक हो गया है, वहां चारकोल रॉट नामक रोग का प्रकोप होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में  फसल को सिंचाई देकर  इसके प्रकोप को कम किया जा सकता है।

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स्रोत-

भा.कृ.अनु.प. – भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान

 

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