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सुगंधित गुलाब की खेती / Rose farming - Kisan Suvidha
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सुगंधित गुलाब की खेती / Rose farming

गुलाब की खेती

सुगंधित गुलाब की खेती / Rose farming

पौधे का परिचय

श्रेणी (Category): सगंधीय
समूह (Group):कृषि योग्य
वनस्पति का प्रकार: झाड़ी
वैज्ञानिक नाम: रोसा सेन्टिफोलिया
सामान्य नाम: सुगंधित गुलाब

 

गुलाब के पौधे की जानकारी

उपयोग 

1.जड़े पेट के अल्सर, रिकेट्स और दस्त में उपयोगी होते है।
2.पत्तियाँ घाव और बवासीर के इलाज में उपोयगी होती है।
3. फूलों का उपयोग अस्थमा, उच्च रक्तचाप, दस्त, खासी, बुखार, अपच, अनिद्रा, घबराहट और तनाव के उपचार में किया जाता है।
4.लाब का उपयोग क्रीम, लोशन और अन्य कास्मेटिक उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है।
5.घर मे इसका उपयोग मक्खन, सायरप, जाम और शहद में किया जाता है ।
6. गुलाब जल का उपयोग मिठाई, पेस्ट्री और केक बनाने में किया जाता है।
7.लाब को सजावटी पौधे के रूप में जाना जाता है।

उपयोगी भाग 

संपूर्ण पौधा

 

उत्पादन क्षमता 

2000-3000 कि.ग्रा./हेक्टेयर फूल

 

उत्पति और वितरण 

गुलाब मूल रूप से मध्य पूर्व का पौधा और कम से कम 3000 साल से इसकी खेती की जा रही हैं। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाया जाता है। यह भारत, फ्रांस, मोरक्को, तुर्की और बुल्गारिया में पाया जाता है। भारत में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर में पाया जाता है। मध्यप्रदेश में भी इसकी खेती की जाती है।

 

वितरण 

सुगंधित गुलाब, सुगंधित तेल देने वाली महत्वपूर्ण फसल है। ताजे चुने हुये फूलों का आसवन करके तेल निकाला जाता है। इसका उपयोग उद्योग में किया जाता है। सुगंधित गुलाब का कुल उत्पादन 15-20 टन है। प्रत्येक फूल में कई पंखुडिया होने के कारण इसे “कैवेज रोज” भी कहा जाता है। सर्वप्रथम इसकी खेती मध्य युग में की गई थी और यह अपनी तीक्ष्ण खुशबू के लिए प्रसिध्द है।

 

वर्गीकरण विज्ञान, वर्गीकृत

कुल 

रोसेसी

आर्डर 

रोसेल्स

प्रजातियां 

आर. सेन्टीफोलिया

वितरण 

सुगंधित गुलाब, सुगंधित तेल देने वाली महत्वपूर्ण फसल है। ताजे चुने हुये फूलों का आसवन करके तेल निकाला जाता है। इसका उपयोग उद्योग में किया जाता है। सुगंधित गुलाब का कुल उत्पादन 15-20 टन है। प्रत्येक फूल में कई पंखुडिया होने के कारण इसे “कैवेज रोज” भी कहा जाता है। सर्वप्रथम इसकी खेती मध्य युग में की गई थी और यह अपनी तीक्ष्ण खुशबू के लिए प्रसिध्द है।

 

आकृति विज्ञान, बाह्रय स्वरूप

1.स्वरूप 

यह एक छोटी बारहमासी सीधी बढ़ने वाली कांटेदार झाड़ी है।
यह एक पर्णपाती झाड़ी है।

2.पत्तिंया 

पत्तियाँ 5 पत्रक के रूप में, अण्डाकार – भाले के आकार की और किनारो पर दांतेदार होती है।

3.फूल 

फूल कई पुंखडी व कई रंग के साथ आमतौर पर गुलाबी रंग के और सुगंधित होते है।
फूल द्दिलिंगी नर और मादा होते है।

4.फल 

फल छोटे और मांसल होते है।

5.बीज 

बीज फूलों में झूलते हुये होते है।
बीज अगस्त से नवम्बर तक पक जाते है।

6.परिपक्व ऊँचाई 

यह झाडी़ 1.5 मीटर तक की ऊँचाई तक ऊगती है।

 

बुवाई का समय

जलवायु 

यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पौधा है।
इसे सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है।

 

भूमि 

पौधे को हल्की (रेतीली), मध्यम (चिकनी बुलई) और भारी चिकनी मिट्टी में पैदा किया जा सकता है।
मिट्टी में अच्छी तरह जल निकसी होना चाहिए।
मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 होना चाहिए।

 

बुवाई-विधि

भूमि की तैयारी 

बुवाई के पहले 3 – 4 बार जोतकर भूमि को तैयार कर लेना चाहिए।
मिट्टी में FYM मिलाना चाहिए।
पौधे एक कतार में लगाना चाहिए।
दो कतारों के बीच 1X1 मी. की दूरी रखना चाहिए।

 

फसल पद्धति विवरण 

1.खेत में लगभग 50 से.मी. व्यास और 50 से.मी. गहरें गड्ढें खोदे जाते हैं।
2.गड्ढ़े पर्याप्त रुप से बड़े होना चाहिए ताकि जड़ों को फैलाकर लगाया जा सके।
3.बुबाई के बाद गड्ढों को मिट्टी और FYM से भर देना चाहिए।
4.रोपण के बाद सिंचाई की जानी चाहिए।
5. दो पौधों के बीच 1 -1.5 मी. की दूरी रखना चाहिए।

 

पौधशाला प्रंबधन

नर्सरी बिछौना-तैयारी (Bed-Preparation) 

अच्छी तरह से व्यवस्थित नर्सरी तैयार की करना चाहिए।
20-25 कि.ग्रा. मेलीथीआन नर्सरी की तैयारी के समय मिट्टी के साथ मिलाना चाहिए।
पौधों को नर्सरी में 10 X 45 से.मी. की दूरी पर लगाना चाहिए।
रोपण के समय सावधानी रखना चाहिए कि कलम का निचला हिस्सा नीचे रहे और ऊपरी हिस्सा ऊपर रहे।

रोग प्रबंधन

१.आल्टरनेरिया आल्टरनेटा (पर्ण अंगमारी )

पहचान करना-लक्षण 

यह रोग वैक्टीरिया द्दारा होता है जो पौधे के ऊतकों को नष्ट कर देती है।
पत्तियों पर धब्बे पड़ने से पत्तियाँ कमजोर पड़ जाती है।

 

उत्पादन प्रौद्योगिकी खेती

खाद 

1. 8-10 टन पकी हुई FYM की आवश्यकता होती है।
2. 100 : 80 : 60 / हेक्टेयर NPK पौधे के अच्छे विकास के लिए देना चाहिए।
3.रोपाई के समय N की आधी खुराक और P और K की पूरी खुराक मिट्टी में मिलाकर देना चाहिए और शेष N की खुराक रोपाई के बाद देना चाहिए।
4.यूरिया का घोल भी फसल के लिए अच्छा होता है।

 

सिंचाई प्रबंधन 

सिंचाई रोपण के 20-30 दिनों के बाद करना चाहिए ।
बरसात के मौसम से पहले नियमित रूप से सिंचाई करना चाहिए।

 

घसपात नियंत्रण प्रबंधन 

रोपण के पहले चरण में निंदाई की आवश्यकता होती है।
नवंबर से जनवरी तक 2-3 बार निंदाई करना चाहिए।

 

कटाई

तुडाई, फसल कटाई का समय 

तुड़ाई के लिए उचित समय प्रात: काल का होता है।
दोपहर के बाद का समय तुड़ाई के लिए उपयुक्त नहीं होता है।
तुड़ाई के तुरंत बाद फूल आसवन के लिए भेजना चाहिए।

 

फसल काटने के बाद और मूल्य परिवर्धन

आसवन (Distillation) 

फूलों का आसवन जल आसवन विधि के द्दारा किया जाता हैं।
आसवन के लिए जल और फूल 6 : 1 के अनुपात में होना चाहिए।
एक किलो ग्राम गुलाब तेल 3000-4000 किलोग्राम फूलों से प्राप्त होता है।

भडांरण (Storage) 

सुगंधित गुलाबों को सीमित हवा के संचारण के साथ शुष्क वातावरण में संग्रहित करना चाहिए।
लंबे समय तक संग्रहीत करने से तेल की मात्रा में कमी हो सकती है।

परिवहन 

सामान्यत: किसान अपने उत्पाद को बैलगाड़ी या टैक्टर से बाजार तक पहुँचता हैं।
दूरी अधिक होने पर उत्पाद को ट्रक या लाँरियो के द्वारा बाजार तक पहुँचाया जाता हैं।
परिवहन के दौरान चढ़ाते एवं उतारते समय पैकिंग अच्छी होने से फसल खराब नहीं होती हैं।

अन्य-मूल्य परिवर्धन (Other-Value-Additions) 

गुलाब जल
गुलाब जेल
गुलाब इत्र

 

Source-

  • jnkvv-aromedicinalplants.in

 

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