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संकर धान (जे.आर.एच.-5) की बीजोत्पादन प्रौद्योगिकी -मध्यप्रदेश - Kisan Suvidha
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संकर धान (जे.आर.एच.-5) की बीजोत्पादन प्रौद्योगिकी -मध्यप्रदेश

संकर धान

संकर धान (जे.आर.एच.-5) की बीजोत्पादन प्रौद्योगिकी -मध्यप्रदेश

खाद्यान्न की आत्मनिर्भरता बनाये रखने के लिए हमें लगभग 1.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष चांवल की अतिरिक्त आवश्यकता होगी । इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सीमित विकल्पों में संकर धान तकनीक मुख्य है । यह तकनीक वर्तमान में उपलब्ध उच्च उत्पादनशील प्रजातियों की स्थिर उत्पादन क्षमता को 15-20% आगे ले जाने में सक्षम है । जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय द्वारा विकसित नई संकर धान किस्म जे.आर.एच.-5 जल्दी पकने योग्य गुणवत्ता, लम्बा महीन दाना के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाला संकर धान है|

 

संकर धान बीजोत्पादन वस्तुत

दो चरणों की प्रक्रिया है-

चरण 1: ए लाइन बीजोत्पादन
ए लाइन * बी लाइन → ए लाइन

चरण 2: संकर धान बीजोत्पादन
ए लाइन * आर लाइन → संकर

बी एवं आर लाइनों के बीजों का उत्पादन शुद्ध प्रजातियों की तर्ज पर किया जाता है । स्ंकर धान बीजोत्पादन की मुख्य विधियाँ
बीज दर ‘ए’ लाइन : 15 कि./हे. आर लाइन : 7.5 कि./हे.
पृथक्करण दूरी 100 मीटर
पंक्ति अनुपात 2 आर : 6 ए या 2 आर : 8 ए
बार्डर पंक्तियाँ 2-4 (आर लाइन) की पंक्तियाँ
पंक्ति से पंक्ति की दूरी आर : आर = 30 सें. मी., आर : ए = 20 सें. मी.
पौधे से पौधे की दूरी आर : आर = 15 सें. मी., ए : ए = 15 सें. मी.
पत्ती कतरना प्रस्फुटन पर ऊपर से 1/3 से 2/3 तक पत्तीयाँ कतर दें |
जी ए 3 का छिड़काव 15-25% बालियाँ आने पर 40 ग्राम जी ए 3 रसायन को 500 लीटर पानी में मिलाकरप्रति हेक्टेयर छिड़काव करें | अगले दिन 25 ग्राम जी ए 3 को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर दूसरा छिड़काव करें |
सम्पूरक परागण बांस की सहायता से 30-45 मिनट के अन्तराल पर दोपहर तक दो-तीन बार करें |
रोगिंग आफ टाइप और पोलन शैडरों को उखाड़कर बाहर करें |

 

सिंक्रोनाइजेशन ( तालमेल )

दो विभिन्न पैतृक लाइनों की नर्सरी समय के अन्तराल पर लगाई जाती है । वारांगल की परिस्थितियों में ए लाइन की नर्सरी बोने के पश्चात आर लाइन की बोनी तीन, पाँच एवं नौ दिनों के अन्तराल में करें । दोनों पेरेन्टल लाइनों की रोपाई एक साथ ही की जाती है । उपरोक्त तीन तिथियों की लगी आर. लाईन की पौध को आगे पीछे रोपा जाता है । मौसम की परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सिंक्रोनाइजेशन उर्वरकों (नत्रजन/फास्फेटिक) के छिड़काव द्वारा किया जाता है। यूरिया का 2% छिड़काव पुष्पन को 2-3 दिन विलम्बित कर देता है । इसके विपरीत 2% फास्फेटिक उर्वरक का छिड़काव पुष्पन को 2-3 दिन पहले कर देता है ।

 

पोलन शैडर की पहचान

पोलन शैडर, ए लाइन से 5-7 दिन पूर्व पुष्पन पर आते हैं तथा उनकी पूरी बालियाँ पत्तियों से निकल कर बाहर आ जाती है । इनके एंथर सुडौल गहरे पीले रंग के होते है ।

 

कटाई

पकने पर नर पौधों की पंक्यिों को काट कर खेत से बाहर निकाल दें, तत्पश्चात मादा पौधों की कटाई करें । मादा पौधों की कटाई से प्राप्त बीज संकर बीज होगा ।

 

ए लाइन का बीजोत्पादन

ए लाइन का बीजोत्पादन भी उपरोक्त शैली से ही किया जाता है । यद्यपि इसमें बी लाइन को नर पैतृक (मेल पेरेन्ट) की तरह उपयोग में लाया जाता है, तथा इनके बीजोत्पादन के लिए 200 मीटर की पृथक्करण दूरी की आवश्यकता होती है । ए लाइन की नर्सरी बोने के तीन दिन पश्चात बी लाइन का 50% बीज लगाया जाता है तथा शेष 50% बीज को पाँच दिन बाद लगाया जाता है । बी लाइन (नर पैतृक) के पौधों को परागण पूरा होने के बाद काट कर खेत से बाहर निकाल दिया जाता है ।

 

 

स्रोत-

  • जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर,मध्यप्रदेश

 

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