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मटर फल्ली से लाभ कमायें फसल अवशेष से हरी खाद बनायें - Kisan Suvidha
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मटर फल्ली से लाभ कमायें फसल अवशेष से हरी खाद बनायें

मटर फल्ली

मटर फल्ली से लाभ कमायें फसल अवशेष से हरी खाद बनायें

मटर की बोनी का रकवा बढ़ता जा रहा है ।  मटर की फसल की बोवाई के 60 – 65 दिन बाद फल्लियों की 3 – 4 बार तोड़ाई के बाद किसाने भाई अगली फसल फसल गेहूं की तैयारी में लग जाते हैं ।
इसी तैयारी में उनको भारी समस्या और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और वह मटर की फल्लियों के तोड़ने के बाद बचे अवशेष को खेतों से बाहर फेकने में मसक्कत करनी ही पड़ती है, जिससे लागत बढ़ती है व गेंहू फसल के लिए देर हो जाती है ।
इस विकट समस्या से अब आसानी से निजात पाया जा सकता और वह है:-

 

मटर के हरे पौधों को खेत में ही मिला दें

इस दिशा में कुछ प्रगतिशील कृषकों ने एवं इफको के क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर ने संभाग में वर्ष 2011 – 12 में कुछ प्रयोग किसानों के खेतों में किये जिनके सुखद परिणाम सामने आये हैं ।

 

तो आपको क्या करना है ?

मटर के हरे पौधों को खेत से बाहर निकालने की बजाय रोटावेटर से जुताई कर खेत में मिला दें । इसमें हरा बायोमास 150 – 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है । इस परिणाम को जानने के लिए प्रति वर्गमीटर फसल को तौल कर देखा गया है । सूखा बायोमास देखा गया तो 20 – 25 टन बायोमास प्राप्त होता है । यदि इसे रोटावेटर द्वारा खेत में मिलाया जाता है तो पोषक तत्वों के अलावा मृदा को जीवांश मिलेगा । जो आपकी अगली फसल गेहूं अथवा जो आप ले रहे हैं, उसको पूरा लाभ मिलेगा ।

मटर फसल के अवशेषों को यदि मिट्टी में मिला दिया जाता है तो उसका अपघटन ( मृदा में डि – कम्पोजीशन ) शीघ्र होता है और आसानी से आगामी फसल बोई जा सकती है । अधिकतर मटर के बाद किसान भाई शीघ्र पकने वाली पिछेती गेहूं की बोनी ही करते हैं ।
डि – कम्पोजीशन शीघ्र क्यों होता है – क्योंकि मिट्टी के अवशेषों का कार्बन और नाइट्रोजन अनुपात 30ः1 के आसपास होता है, जो जल्दी विघटन के लिए उत्तम होता है ।

 

इससे आपको क्या फायदा है –

  • समय और श्रम की बचत होगी ।
  • तीन – चार बार फसलें लेने से कम हो रही जमीन की उर्वरा शक्ति की पूर्ति हो सकेगी ।
  • जमीन के पोषण स्तर की कमी दूर हो सकेगी । प्रति हेक्टेयर 20 – 22 टन बायोमास जमीन को मिलता है ।
  • उत्पादन एवं उत्पादकता में आ रही स्थिरता को दूर करेगा ।
  • मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा मृदा में नत्रजन, स्फुर एवं पोटाश के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है ।
  • जमीन में सूक्ष्म जीवों को पोषण मिलने से उनकी संख्या व सक्रिया बढ़ती है । फलस्वरूप उत्पादन में वृद्धि होती है ।

 

स्रोत-

  • संयुक्त संचालक कृषि जबलपुर संभाग, जबलपुर

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