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मक्के की वैकल्पिक जुताई तकनीकें - Kisan Suvidha
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मक्के की वैकल्पिक जुताई तकनीकें

मक्के की जुताई तकनीकें

मक्के की वैकल्पिक जुताई तकनीकें

वैकल्पिक जुताई तकनीकें

वर्तमान सहस्त्राबदी में पिछले वर्षों की तुलना में कृषि क्षेत्रों के लिए चुनौतियाँ भिन्न हैं । सन् 2030 तक खाद्यान्न की जरूरत 300 मीलियन टन तक पहुँच जायेगी । ऐसी स्थिति में हमें और अधिक मक्का का उत्पादन करना होगा क्योकि क्षेत्रफल के बढ़ने की सम्भावना नहीं है, अतः ,खाद्यान्नों की माँग को पूरा करने के लिए उत्पादकता बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है ।

पिछले वर्षों में मक्का उत्पादन में वृद्धि एकल संकर मक्का की उन्नत प्रजातियों के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी तथा संसाधन प्रबंधन में सुधार के कारण हुई है विगत वर्षों में विभिन्न संस्थानों में हुए शोध के परिणाम रूवरूप् विभिन्न जुताई एवं संसाधन प्रबंधन तकनीकों का विकास हुआ जिसमें शून्य भूपरिष्करण, रोटरी टिलेज एवं फर्ब पद्धति प्रमुख हैं । यह जुताई तकनीकें अपनाकर किसान भाई उत्पादन लागत को कम करके अधिक उत्पादन ले सकते हैं, और इसकी गुणवत्ता को अन्तराष्ट्रीय बाजार के उपयुक्त भी बना सकते हैं ।

कम लागत वाली इन तकनीकों का विकास करने के उपरांत इन्हें कृषकों के खेतों पर भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया जा चुका है । ये तकनीकें निम्नांकित हैं|

 

जीरो टिलेज या शून्य – भूपरिष्करण तकनीक

पिछली फसल की कटाई के उपरांत बिना जुताई किए मशीन द्वारा मक्का की बुवाई करने की प्रणाली को जीरो टिलेज कहते हैं । इस विधि से बुवाई करने पर खेत की जुताई करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है तथा खाद एवं बीज की एक साथ बुवाई की जा सकती है । इस तकनीक से चिकनी मिट्टी के अलावा अन्य सभी प्रकार की मृदाओं में मक्का की खेती की जा सकती है । जीरो टिलेज मशीन साधारण ड्रिल की तरह ही है, परन्तु इसमें टाइन चाकू की तरह होता है । यह टाइन मिट्टी में नाली के आकार  की दरार बनाता है, जिसमें खाद एवं बीज उचित मात्रा में सही गहराई पर पहुँच जाता है ।

 

जीरो टिलेज विधि अपनाने के निम्नलिखित लाभ हैं

1. इस मशीन द्वारा बुवाई करके करीब 60-70 प्रतिशत ईंधन एवं समय की बचत की जा सकती है ।साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी कम होता है|

2. इस विधि को अपनाने से खरपतवारों का जमाव कम होता है (विशेष तौर से चैड़ी पत्ती वालेखरपतवारों का )

3. इस विधि से खेत की बुवाई करने पर लगभग 2000-2500 रू0 प्रति हेक्टेयर की बचत होती है ।

4. खेत को तैयार करने के समय को बचा कर बुवाई 10-15 दिन पहले की जा सकती है और समय से बुवाई करने से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है

 

फर्ब तकनीक से बुवाई

मक्का की बुवाई सामान्यतः तौर से लाईनों में की जाती है । फर्ब तकनीकी किसानों में प्रचलित इस विधि से सर्वथा भिन्न है । इस तकनीक में मक्का को ट्रेक्टर चलित रीजर-कम ड्रिल से मेंड़ों पर एक पंक्ति में बोया जाता है । पिछले कुछ वर्षों के अनुसंधान में यह पाया गया है कि इस तकनीक से खाद एवं पानी की काफी बचत होती है और उत्पादन भी प्रभावित नहीं होता है । इस तकनीक से बीज उत्पादन के लिए भी मक्का की खेती की जा रही हैं । बीज उत्पादन का मुख्य उद्देश्य अच्छी गुणवता वाले अधिक से अधिक बीज उपलब्ध कराना है ।

 

मेड़ (रिज) पर मक्का बोने के लाभ

1. बीज, खाद व पानी की मात्रा में कमी एवं बचत ।
2. उत्पादन लागत में कमी ।
3. फसल को पकने से पूर्व गिरने से बचाने के लिए और अधिक उत्पादन के लिए ।
4. क्षारीय व लवणीय मृदाओं में अधिक पैदावार ली जा सकती है ।
5 .इस विधि से मक्का उत्पादन करने पर न सिर्फ नालियों का प्रयोग सिंचाई के लिए किया जाता है । अपितु अधिक पानी (वर्षा ऋतु में) की निकासी के लिए भी किया जा सकता है ।
6 .छोटे पौधों में मशीन द्वारा निराई-गुड़ाई की जा सकती है ।
7. अवांछित पौधों को निकालने में आसानी रहती है ।

 

मक्का की बुवाई पूर्व से पश्चिम दिशा वाली मेड़ के उत्तरी भाग में की जानी चाहिए । इससे लवण-क्षार की समस्या से कुछ हद तक बचा जा सकता है क्योंकि सूर्य की किरणें सीधी मृदा पर नहीं पड़ती हैं । इससे क्षार सूर्य की किरणों वाली दिशा में ही ज्यादा आते हैं ।

पंक्ति से पंक्ति तथा पौधे से पौधे की दूरी निम्नलिखित प्रकार से सुनिश्चित की जानी चाहिए|

 

सामान्य

मक्का

गुणवता युक्त प्रोटीन वाली मक्का (क्यू.पी.एम -½ मीठी मक्का (स्वीटकॉर्न) शीशु मक्का

(बेबीकॉर्न

चारे के लिए
पौधे से पौधे की

दूरी (सें.मी.)

20&22 20&22 25&30 15&20 30
पंक्ति से पंक्ति की दूरी (सें.मी.) 60&75 60&75 75 55&60 10
पृथ्क्कारण दूरी (आईसोलेशन) (मी.) लागू नहीं 150&200 150&200 150&200 लागू नहीं

 

मक्का की अच्छी उपज लेने के लिए निम्नलिखित मक्का की उन्नत किस्म के शुद्ध प्रमाणित बीज ही बोये जाने चाहिए ।

  • क्यूपीएम : एच क्यू.पी.एम.1 एवं 5 (सम्पूर्ण भारत के लिए), विवेक क्यू.पी.एम. 7(प्रायद्विपीयभारत  के लिए),  शक्तिमान 1, 3 एवं 4 (बिहर के लिए) एवं शक्ति-1 (संकुल)
  • पाॅपकाॅर्न  : वी.एल. पाॅपकाॅर्न, अम्बर, पर्ल एवं जवाहर
  • बेबीकाॅर्न : एच.एम.4 एवं वी.एल. बेबीकाॅर्न – 1
  • मीठी मक्का: माधुरी, विनओरेंज, प्रिया एवं एच.एस.सी. – 1 (संकर)
  • चारे के लिए: अफ्रिकन टाल, जे – 1006, प्रताप चरी – 6

 

Source-

  •     मक्का अनुसंधान निदेशालय

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