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फल-फूल झड़ने की समस्या से बचाव - Kisan Suvidha
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फल-फूल झड़ने की समस्या से बचाव

फल फूल की समस्या से बचाव

फल-फूल झड़ने की समस्या से बचाव

कुछ पौधों की जातियों में वंशीय गुणों के कारण फूलों के मुख्य अंग आपस में मिलने में असमर्थ हो जाते हैं अथवा प्रसंकर पैदा हो जाते हैं, इसलिए भी बाग में फूल एवं फल झड़ने की समस्या देखी जाती है ।

 

कार्बोहाइड्रोजन का अनुपात

वृक्षों के कार्बोहाइड्रेट एवं नाइट्रोजन के अनुपात में असंतुलन के कारण भी फूल नहीं आते हैं । यह असंतुलन नाइट्रोजन की अधिकता के कारण होता है, परिणामस्वरूप् पौधे  की वानस्पतिक वृद्धि तो होती रहती है , परन्तु कार्बोहाइड्रेट का संचयन नहीं हो पाता है, जिससे पौधों में फूल नहीं बनते हैं ।

 

पोषक तत्वों की कमी

फल वृक्षों में पोषक तत्व अप्रत्यक्ष रूप से फूलने की क्रिया को प्रभातिव करते हैं, जिनमें फास्फोरस, बोराॅन, सल्फर आदि प्रमुख हैं । इन तत्वों की कमी से भी फूल पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते हैं ।

 

जलवायुवीय कारक

वातावरण की परिस्थितियों के कारण अथवा मौसम के बदलने, तापक्रम के अत्याधिक उच्च या निम्न होने, सूर्य के प्रकाश, आर्द्रता, असमय वर्षा, अत्याधिक ठण्डी या गर्म एवं तेज हवाएं आदि जलवायुवीय कारक भी फल वृक्षों में अफलन की समस्या पैदा कर देते हैं ।

 

रोग एवं कीटों का प्रकोप

रोग एवं कीटों के प्रकोप के कारण भी फूल और फल झड़ना प्रारंभ कर देते हैं । इनका प्रकोप प्रतिकूल वातावरण एवं उचित पादप सुरक्षा न अपनाने के कारण होता है ।

 

फूल आने के समय अत्याधिक रसायनों का छिड़काव

कभी-कभी किसान भाई फूल आने के समय रसायनों का ज्यादा छिड़काव कर देते हैं, जिससे पुंकेसर नष्ट हो जाते हैं तथा परागण बह जाते हैं और परागकण करने वाले कीट मर जाते हैं । परिणामस्वरूप् गर्भाधान की क्रिया नहीं होती अफलन का सामना करना पड़ता है

समस्या से बचाव

किसान भाई, उद्यान मालिक यदि थोड़ी सावधानी बरतें और निम्न पहलुओं को अपनाएं तो इस अफलन की समस्या, फूलों के झड़ने की समस्या से निजात पाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करके धन कमा सकते हैं

 

उचित समय पर कर्षण क्रियाऐं

पौधों में सिंचाई खाद एवं उर्वरक, निंदाई-गुड़ाई आदि कर्षण क्रियाऐं उपयुक्त समय एवं पर्याप्त मात्रा में ही करें, ताकि वृद्धि एवं फलन ठीक प्रकार से हो ।

 

रोग एवं कीटों पर नियंत्रण

जो रोग कीट फलों, फूलों को नष्ट करते हैं उनकी सही समय पर रोकथाम कर दें, वायुवृत्ति को लगायें – ठण्डी, गर्म एवं तेज हवाओं तथा पाले से बचाव के लिए बाग के उत्तर एवं पश्चिम दिशा में ऊंचे पेड़ों की वायुवृत्ति लगा दें ताकि फूल एवं फल झड़ने से बच सकें ।

 

वृद्धि नियामकों का उपयोग

पौधों में मूल समस्या फूल झड़ने व फल गिरने की होती है । अतः इनके बचाव के लिए एन.ए.ए. की 20 से 40 पी.पी.एम. मात्रा का छिड़काव रोपा लगाने के 25 दिनों बाद करना लाभकारी होता है । प्लेनोफिक्स की 2 से 4 मि.ली. मात्रा का 4.50 ली. पानी में घोल बनाकर ऊपर दिए समय के अनुसार छिड़काव करने से लाभ होता है, ध्यान रहे कि अधिक शुष्क क्षेत्रों में दवाई की कम मात्रा और नमी वाले क्षेत्रों में अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है ।

 

स्रोत-

  • कृषि विज्ञान केन्द्र, कालूखेड़ा, जिला रतलाम,मध्यप्रदेश

 

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