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तिल की उन्नत खेती-मध्यप्रदेश - Kisan Suvidha
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तिल की उन्नत खेती-मध्यप्रदेश

तिल की खेती

तिल की उन्नत खेती-मध्यप्रदेश

तिलहनी फसलों में तिल का प्रमुख स्थान है इसकी खेती खरीफ एवं रबी मौसम में की जाती है।

तिल की उन्न्त किस्मे

किस्म विमोचन वर्ष अवधि (दिन) उपज किलोग्राम हे. तेल की मात्रा (प्रतिशत)
टी.के.जी.308 2008 80-85 600-700 48-50
जे.टी.11 2008 82-85 650-700 46-53
जे.टी.12 2008 82-85 650-700 50-53
जे.टी.306 2004 86-90 600-900 52
जे.टी.एस.-8 2000 86 600-700 52
टी.के.जी.-55 1998 75-78 630-650 53

 

बीज की मात्रा

कतार विधि – 1.5 कि.ग्रा./एकड़ ।

 

बीजोपचार

कार्बेण्डाजिम 1 ग्राम + थायरम 2 ग्रा./कि.ग्रा. बीज या ट्राईकोडर्मा विरडी 5 ग्रा./कि.ग्रा. बीज ।

 

बुवाई  का समय

खरीफ-25 जून से 15 जुलाई, ग्रीष्मकालीन-15 जनवरी से 15 फरवरी ।

 

बुवाई की विधि

कतार से कतार की दूरी – 30 से.मी., पौध से पौध की दूरी – 15 से.मी. और गहराई – 3 से.मी. ।

 

उर्वरक

(कि.ग्रा. प्रति एकड़)

 

असिंचित अवस्था

यूरिया 35, सिं.सु.फा.- 75, म्यूरेट आॅफ पोटाश-13 ।

 

सिंचित अवस्था

यूरिया 52, सिं.सु.फा.- 100, म्यूरेट आॅफ पोटाश-13 ।

 

कटाई

फलिया पीली एवं पत्तियां झड़ने लगे तब फसल की कटाई करें ।

 

गहाई

कटाई के 8 – 10 दिन फसल को सुखाकर डण्डों से पीटकर गहाई करें ।

 

भण्डारण

बीज को सुखाने पर उसमें 8 प्रतिशत नमी रह जाये तब उसका ठीक से भण्डारण करें ।

 

सिंचाई

फलियों में दाना भरते समय सिंचाई करें ।

 

निंदाई

प्रथम निंदाई

बुवाई के 15-20 दिन बाद और दूसरी निंदाई-बुवाई के 35-40 दिन बाद करें ।

 

नींदानाशक दवा

क्विजालोफाॅप 300 मि.ली./एकड़ बुवाई के 15-20 दिन बाद ।

 

रोग प्रबंधन

१.फाइटोफ्थोरा अंगमारी

पत्तियों तथा तनों पर भूरे धब्बे दिखते हैं जो बाद में काले हो जाते हैं ।

नियंत्रण

थायरम 3 ग्राम/कि.ग्रा. या ट्राईकोडर्मा विरडी 5 ग्रा./कि.ग्रा. बीज की दर से बीजोपचार करें । रोगग्रस्त फसल में रिडोमिल एम.जेड. 2.5 ग्रा./ली. पानी या काॅपर आॅक्सीक्लोराइड 2.5 ग्रा./ली. पानी का छिड़काव करें ।

 

२.पर्णताभ रोग (फायलोडी)

फूल के सभी भाग हरे पत्तियों के समान हो जाते हैं । सवंमित पौधें में पत्तियां गुच्छों में छोटी-छोटी दिखाई पड़ती हैं ।

नियंत्रण

नीम तेल 5 मि.ली. या डायमेथोएट 3 मि.ली./ली. पानी की दर से छिड़काव करें ।

 

३.जीवाणु अंगमारी

पत्तियों एवं फलियों पर अनियमित आकार के भूरे सघन छल्ले युक्त धब्बे बनते हैं ।

नियंत्रण

स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 200 पी.पी.एम. एवं काॅपर आॅक्सीक्लोराइड 500 ग्रा./एकड़ की दर से छिड़काव करें ।

 

प्रमुख कीट

१.पत्ती एवं फली छेदक

कीट पत्तियों को गूंथकर फलों में घुसकर भीतरी भाग खाकर तथा फल में छेदकर बीज खाकर फसल को नुक्सान पहुंचाता है ।

 

२.तिल पिटिका मक्खी (कली मक्खी)

इल्ली कलियों के अन्दर फूल के आवश्यक अंगों को नष्ट कर देती है जिससे फूल की जगह गांठे यानि कलियां सिकुड़ जाती हैं । क्वीनालफास दवा 25 ई.सी. 1.5 मि.ली. या ट्राइजोफाॅस 40 ई.सी. 2 मि.ली./ली. पानी का छिड़काव करें ।

 

स्रोत-

  • कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना (म.प्र.) ,जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय

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