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चना (chickpea) का भरपूर उत्पादन हेतु वैज्ञानिक तकनीक-मध्यप्रदेश - Kisan Suvidha
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चना (chickpea) का भरपूर उत्पादन हेतु वैज्ञानिक तकनीक-मध्यप्रदेश

चने की खेती

चना (chickpea) का भरपूर उत्पादन हेतु वैज्ञानिक तकनीक-मध्यप्रदेश

परिचय (Introduction)

चना एक मुख्य रबी दलहनी फसल है म.प्र. में लगभग 25.6 लाख हेक्टेयर में चने की खेती की जाती है जिससे लगभग 17.30 लाख टन उत्पादन मिलता है म.प्र. में चने का 944 किग्रा/हे. औसत उत्पादन है जबकि उन्नत किस्मों की क्षमता 18-20 क्विंटल/हे. है। इसलिए चने की भरपूर पैदावार लेने के लिए निम्न उन्नत तकनीकी बिन्दुओं को अपनाना आवश्यक है।

 

भूमि का चुनाव एवं उसकी तैयारी (Land Preparation for chickpea)

चने की खेती सभी प्रकार की हल्की से भारी भूमि में की जा सकती है परंतु अच्छे जल निकास एवं जीवांष वाली दोमट तथा काली भारी भूमि इसके लिए अत्याधिक उपयुक्त है। चने के पौधों की जड़ों की समुचित वृद्धि के लिए भूमि की सतह ढीली (ढेलेदार) होना चाहिए। इसके लिए खरीफ की फसल कटने के बाद पलेवा देवें तथा बतर आने पर आड़ा-खड़ा कल्टीवेटर चलावें। नमी संरक्षण हेतु पाटा अवष्य लगावें। असिंचित चने की खेती के लिए खरीफ फसल की कटाई के तुरंत बाद क्राॅस कल्टीवेटर के साथ पाटा चलाकर बोनी करें।

 

चने की उन्नत किस्में (Chickpea Varieties)

1.    चने की देशी उन्नत किस्में-
क्र किस्में पकने की अवधि (दिन) उपज (क्वि./हे.)
1 आर.व्ही.जी 201 110-115 18-20
2 जे.जी. 226 112-115 18-20
3 जाकी 9218 112-115 18-20
4 जे.जी. 16, 112-115 18-20

 

 2. काबुली चने की उन्नत किस्में-
क्र किस्में पकने की अवधि (दिन) उपज (क्वि./हे.)
1 पी.के.व्ही.2 (काक-2) 110-115 15-18
2 जवाहर काबुली चना.- 1 15-18 15-18
3 जवाहर काबुली चना.- 2 95-110 15-19
4 जवाहर काबुली चना.- 3 92-121 14-15
5 आई.पी.सी.के.2002-29 (सुभ्रा) 110-115 20-21

 

3. गुलाबी चना की उन्नत किस्में-
क्र किस्में पकने की अवधि (दिन) उपज (क्वि./हे.)
1 जवाहर गुलाबी चना-1  120-125 14-16

 

बीज दर एवं दूरी(Seed rate and spacing)-

सामान्य रूप से 75 से 100 किलोग्राम बीज की आवश्यकता किस्मों के बीज आकार के अनुसार प्रति हेक्टर होती है । कतारों से कतारों की दूरी 30 सेंमी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 सें.मी.

 

चने का बीजोपचार(Seed Treatment for chickpea)-

फफूंदनाषक दवा थायरम 2 ग्राम तथा कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित करें । इसके बाद बीज को राइजोबियम (5 ग्राम) तथा पी.एस. बी. कल्चर (5 ग्राम) से प्रति किलो बीज के अमोनियम मोलिब्डेट 1.0 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें ।

 

बोने का समय(Sowing time for chickpea)-

सामान्य बोनी का समय 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक है । सिंचित खेती के लिए नवम्बर अन्त तक बोआई कर सकते हैं देर से बोनी की स्थिति में बीज की मात्रा 25 प्रतिषत बढ़ाकर एवं उपयुक्त जाति का चयन करें तथा दिसम्बर के प्रथम सप्ताह तक बोनी करें ।

 

चना उत्पादन के लिए आवश्यक खाद एवं उर्वरक(Fertilizers required for Chickpea cultivation)-

भूमि परीक्षण के अनुसार खाद एवं उर्वरकों को प्रयोग करना चाहिए ।

20 से 25 किलोग्राम नत्रजन,

50-60 किलोग्राम स्फुर,

20 किलोग्राम पोटाष की आवश्यकता होती है ।

 

खरपतवार नियंत्रण ( Weed Control in Chickpea)-

बोनी के लगभग एक माह बाद हेण्ड-हो चलायें सिंचित फसल में पेन्डिमिथालीन 1 लीटर प्रति हेक्टर 400-500 लीटर पानी में घोलकर अंकुरण पूर्व छिड़काव करें।

 

चने की सिंचाई (Irrigation of Chickpea)-

पहली सिंचाई फूल आने से पहले करना चाहिए । यदि दूसरी सिंचाई की आवश्यकता हो तो फली भरते समय देना चाहिए । चना की  फसल में हल्की सिंचाई करें ।

 

चना रोग एवं नियंत्रण (Chickpea diseases and their control)-

(अ) उक्ठा रोग:– इस रोग से नये पौधे मुरझाकर गिर जाते हैं । सामान्यतः यह रोग लगभग 30 से 35 दिन की अवस्था में आता है । रोगी पौधे के तने के नीचे वाले भाग को चीरकर देखने से आंतरिक तन्तुओं में हल्का भूरा या काला रंग दिखाई देता है ।

नियंत्रण की विधिः-  चना की फसल    अक्टूबर माह के अंत में नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह    में करें    ।    उकठा रोग रोधी
जातियां उपयोग करें एवं फसल चक्र अपनायें । ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करें ।
(ब)षुष्क विगलन रोगः– इस रोग को    नियंत्रण करने के लिए गर्मी    में गहरी जुताई करें, समय    पर बोआई करें, अलसी की
अन्तरवर्तीय फसल अवषेष को निकाल    दें तथा रोग निरोधक जातियां    लें बीज उपचारित कर ही    बोआई    करें    ।

(स) आल्टरनेरिया झुलसा रोग:- तने पर भूरे काले धब्बे बन जाते हैं इसकी रोकथाम के लिए रोगी पौधों को उखाड़ दें तथा फसल को अत्यधिक बढ़वार से बचायें । कम प्रकोप होने पर मेन्कोजेब के 0.3 प्रतिषत घोल (3 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करें ।

 

चने में कीट एवं  नियंत्रण(Chickpea pests and their control)

चना फली भेदक

चने की इल्ली के नियंत्रण हेतु प्रोफेनोफाॅस 50 ई.सी. 1.50 लीटर यो क्विनालफाॅस 25 ई.सी. 1.00 लीटर को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें या इंडोक्साकार्ब 14.5 एस.सी. 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर या इमामेक्टिन बेन्जोइट का 200 ग्राम दवा प्रति हेक्टेयर 500  लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें ।

 

कटाई एवं उपज(Harvesting of chickpea)

पौधे की पत्तियां सूख जावें व घेटी का रंग सुनहरा होने पर फसल की  कटाई करें । कटाई में देरी होने से फली गिरने  लगती है । कृषक उन्नत चना तकनीक अपनाकर असिंचित क्षेत्रों में 12 से 14  क्विंटल प्रति हेक्टेयर एवं
सिंचित क्षेत्रों में 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

Source- 

  • Krishi Vigyan Kendra, Rajgarh (M.P.)

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