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मौसम आधारित कृषि सलाह 11 नबम्बर तक के लिए - Kisan Suvidha
20053
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मौसम आधारित कृषि सलाह 11 नबम्बर तक के लिए

कृषि सलाह

मौसम आधारित कृषि सलाह 11 नबम्बर तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि  सलाह दी जाती है।

1.) किसानों को यह सलाह है कि वे मौसम शुष्क रहने की संभावना को देखते हुए, गेंहू की बुवाई हेतू तैयार खेतों में पलेवा तथा उन्नत बीज व खाद की व्यवस्था करें। पलेवे के बाद यदि खेत में ओट आ गई हो तो उसमें गेहूँ की बुवाई कर सकते है। उन्नत प्रजातियाँ- सिंचित परिस्थिति- एच. डी. 2687, एच. डी. 2851, एच. डी. 2894, एच. डी. 2967, एच. डी. 3086, डी. बी. डब्लू .-17 । बीज की मात्रा 100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर होनी चाहिये।बुवाई से पूर्व बीजों को बाविस्टिन या थीरम @ 2-2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें। नत्रजन,फास्फोरस तथा पोटाश उर्वरकों की मात्रा 120, 50 व 40 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर होनी चाहिये।

2.) मौसम को ध्यान में रखते हुए धान की फसल को कटाई के बाद2-3 दिन खेत में सुखाकर गहाई करें। उसके बाद दानों को अच्छी प्रकार से धूप में सूखा लें। भण्डारण के पूर्व दानों में नमी 12 % से कम होनी चाहिए। अनाज को भंडार में रखने से पहले यह सुनिश्चित कर ले कि भंडार कीटाणु तथा विषाणु रहित हों। इसके लिये भंडारों को साफ सुथरा तथा लिपाई कर के अच्छी तरह सुखा दे उसके बाद ही अनाजों को भंडारों में रखें।

3.) किसान चने की बुवाई में ओर अधिक देरी न करें। छोटी एवं मध्यम आकार के दाने वाली किस्मों के लिए 60–80कि.ग्रा. तथा बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 80–100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई30–35 सें. मी. दूर कतारों में करनी चाहिए। प्रमुख काबुली किस्में- पूसा 267, पूसा 1003, पूसा चमत्कार; देशी किस्में – सी. 235, पूसा 246, पी.बी.जी. 1, पूसा 372। बुवाई से पूर्व बीजों को राइजोबियम और पी.एस.बी. के टीकों (कल्चर) से अवश्य उपचार करें।

4.) किसान इस मौसम में जई तथा बरसीम की बुवाई कर सकते हैं। जई की उन्नत किस्में- जे.एच.ओ.-822, ओ.एल.-9 और पूसा ओट-5 तथा बरसीम की उन्नत किस्में- वरदान, बुंदेल बरसीम-1, मसकावी, जे.बी.-3. बीज दर–जई-80-100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर और बरसीम-25-30 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर|

5.) इस मौसम में किसान मसूर की बुवाई कर सकते है। उन्नत किस्म- पूसा मसूर–5 (एल. 4594)। बीजों को राइजोबियम और पी.एस.बी. के टीकों (कल्चर) से अवश्य उपचार करें|

6.) तापमान को ध्यान में रखते हुए मटर की बुवाई में ओर अधिक देरी न करेंअन्यथा फसल की उपज में कमी होगी तथा कीड़ों का प्रकोप अधिक हो सकता है। उन्नत किस्में – पूसा प्रगति, आर्किल, आजाद मटर-3, पंत मटर-3, बोनविले। बीजों को कवकनाशी केप्टान या थायरम @ 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से मिलाकर उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें। गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा कर ले और राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दें तथा अगले दिन बुवाई करें।

7.) वर्तमान मौसम आलू की बुवाई के लिए अनुकूल है अतः किसान आवश्यकतानुसार आलू की किस्मों की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में – कुफरी बादशाह, कुफरी ज्योति (कम अवधि वाली किस्म), कुफरी अलंकार, कुफरी चंद्रमुखी। कतारों से कतारों तथा पौध से पौध से दूरी 45´20 या 60´15 से.मी. रखें। बुवाई से पूर्व बीजों को मेन्कोजेब @ २.0 ग्रा. तथा कार्बंडिजम @ 1.0 ग्रा. प्रति लीटर घोल में प्रति कि.ग्रा. बीज पाँच मिनट भिगोकर रखें। उसके उपरांत बुवाई से पूर्व किसी छायादार जगह पर सूखने के लिए रखें।

8.) किसान लहसुन की बुवाई अतिशीघ्र करें। उन्नत किस्में –जी-1, जी-41, जी-50, जी-282.| खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें।

9.) इस मौसम में किसान गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में – पूसा रूधिरा और पूसा केसर। बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. की दर से उपचारित करें तथा खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें । गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज 1.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है, जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।

10.) किसान इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली-जापानी व्हाईट,हिल क्वीन, पूसा मृदुला (फ्रेच मूली); पालक-आल ग्रीन,पूसा भारती; शलगम-पूसा स्वेती या स्थानीय लाल किस्म;बथुआ- पूसा बथुआ-1; मेथी-पूसा कसुरी; गांठ गोभी-व्हाईट वियना,पर्पल वियना; तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई मेड़ों  पर करें।

11.) वर्तमान मौसम प्याज की बुवाई के लिए अनुकूल है। बीज दर– 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर। बुवाई से पहले बीजों को केप्टान@ 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार अवश्य करें।

12.) वर्तमान तापमान स्नोबोल किस्म की फूलगोभी, सलाद, बन्दगोभी और ब्रोकली की पौधशाला बनाने के लिए अनुकूल है अतः किसान बीजों को उपचार करने के बाद उथली पौधशाला पर बुवाई करें। ब्रोकली की उन्नत किस्में– पालम समृद्धि, पालम कचंन (सामान्य किस्में), ऐश्वर्या, पेकमेन (संकर किस्में)। यह अवश्य ध्यान रखें कि बीज विषाणु रोग रहित हो।

13.) आम या अन्य फलों के बागों में खाद व उर्वरकों का इस्तेमाल करने का यह सही समय है।

14.) पछेती गैदें की तैयार पौध की रोपाई करें।

 

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

  • डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
  • डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)
  • डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)
  • डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
  • डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

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