Email - info@kisansuvidha.com

Contact no. – 07999722204

Top
मौसम आधारित कृषि सम्बन्धी सलाह 19 अगस्त 2018 तक के लिए - Kisan Suvidha
13631
post-template-default,single,single-post,postid-13631,single-format-standard,mkd-core-1.0,wellspring-ver-1.2.1,mkdf-smooth-scroll,mkdf-smooth-page-transitions,mkdf-ajax,mkdf-blog-installed,mkdf-header-standard,mkdf-sticky-header-on-scroll-down-up,mkdf-default-mobile-header,mkdf-sticky-up-mobile-header,mkdf-dropdown-default,mkdf-header-style-on-scroll,mkdf-full-width-wide-menu,mkdf-search-dropdown,wpb-js-composer js-comp-ver-5.0.1,vc_responsive

मौसम आधारित कृषि सम्बन्धी सलाह 19 अगस्त 2018 तक के लिए

कृषि सलाह 19 अगस्त तक

मौसम आधारित कृषि सम्बन्धी सलाह 19 अगस्त 2018 तक के लिए

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि सम्बन्धी सलाह दी जाती है।
  1. इस मौसम में किसान अपनी फसलों व सब्जियों में निराई-गुडाई का कार्य शीघ्र करें तथा नत्रजन की दूसरी मात्रा का छिड़­काव करें ।
  2. इस मौसम में किसान अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। खडी फसलों में यदि सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।
  3. इस मौसम में धान की फसल में कीटों की निगरानी करें। तना छेदक कीट की निगरानी हेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4 /एकड़ लगाए। यदि पत्त्ता मरोंड या तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक हो तो करटापदवाई 4% दानें 10किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।
  4. इस मौसम में मक्का में तना छेदक कीट की निगरानी करें। यदि प्रकोप अधिक दिखाई दे तो कार्बरिल पाउड़र2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  5. इस मौसम में किसान स्वीट कोर्न (माधुरी, विन ओरेंज)  तथा बेबी कोर्न (एच एम-4)की बुवाई रोपाई मेड़ों पर कर सकते हैं।
  6. इस मौसममें दलहनी फसलों (मूंग, उडद) में यदि सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।
  7. इस मौसम में किसान गाजर की (उन्नत किस्म- पूसा वृष्टि) बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। बीज दर 4.0-6.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें।
  8. इस मौसम में सब्जियों में (टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी व पत्तागोभी) फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी वपत्तागोभी में डायमंड़ बेक मोथ की निगरानी हेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4 /एकड़ लगाए तथा प्रकोप अधिक दिखाई दे तो स्पेनोसेड़ दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।
  9. इस समय जिन किसानों की टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी व पत्तागोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को मध्यनजर रखते हुए रोपाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें। तथा जल  निकास का प्रबन्ध करें।
  10. इस समय किसानफूलगोभी की पूसा शरद, पूसा हाइब्रिड-2 पंत शुभ्रा (नवम्बर-दिसम्बर) की रोपाई हेतु पौध तैयार करना शुरु कर सकते हैं। खरीफ प्याज की तैयार पौध की रोपाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें। तथा जल निकास का प्रबन्ध करें।
  11. किसान इस समय सरसों साग-पूसा साग-1, मूलीवर्षा की रानी, समर लोंग, लोंग चेतकी; पालक– आल ग्रीन तथा धनियापंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें।
  12. कद्दूवर्गीय सब्जियों को ऊपर चढाने की व्यवस्था करे ताकि वर्षा से सब्जियों की लताओं को गलने से बचाया जा सके।
  13. कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि, वेपरांगण में सहायता करती है इसलिए जितना संभव होमघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें। कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहें, कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें। फलमक्खी से प्रभावित फलों को तोड़कर गहरे गड्डे में दबा दें, फलमक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (10%) का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें  ताकि फलमक्खी का नियंत्रण हो सके।
  14. इस मौसम में मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  15. इस मौसम में भिंडी, मिर्च तथा बैंगन की फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर फासमाईट @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी तथा जैसिड और होपर कीट के रोकथाम के लिए रोगोर कीटनाशक @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  16. किसान प्रकाश प्रपंश (Light Trap) का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल या थोडा रोगोर मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।
  17. इस समय फलों (आम, नींबू, अमरुद आदि) के नऐ बाग लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता के पौधों का प्रबन्ध करके इनकी रोपाई शीघ्र करें।
  18. इस समय गेदें के फूलों की (पूसा नारंगी) पौध जालीघर में तैयार करें तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध रखे।

 

स्रोत-

  • भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थाननई दिल्‍ली – 110012

No Comments

Sorry, the comment form is closed at this time.

Show Buttons
Hide Buttons