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किसान भाईयों के लिए कृषि सम्बन्धी सलाह 31 अक्टूबर तक लागू - Kisan Suvidha
20072
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किसान भाईयों के लिए कृषि सम्बन्धी सलाह 31 अक्टूबर तक लागू

कृषि सम्बन्धी सलाह 21 अक्टूबर

किसान भाईयों के लिए कृषि सम्बन्धी सलाह 31 अक्टूबर तक लागू

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि सम्बन्धी सलाह दी जाती है।

1.) मौसम को ध्यान में रखते हुए धान की फसल यदि कटाई योग्य हो गयी तो कटाई शुरू करें।फसल कटाई के बाद फसल को 2-3 दिन खेत में सुखाकर गहाई कर लें। उसके बाद दानों को अच्छी प्रकार से धूप में सूखा लें। भण्डारण के पूर्व दानों में नमी 12 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।

2.) मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि धान की पकने वाली फसल की कटाई से दो सप्ताह पूर्व सिचाई बंद कर दें। फसल कटाई के बाद फसल को 2-3 दिन खेत में सूखाकर गहाई कर लें। उसके बाद दानों को अच्छी प्रकार से धूप में सूखा लें।

3.) किसान मौसम को ध्यान में रखते हुए गेंहू की बुवाई हेतू खाली खेतों को तैयार करें तथा उन्नत बीज व खाद की व्यवस्था करें। उन्नत प्रजातियाँ- सिंचित परिस्थिति- श्रेष्ठ (एच. डी. 2687), पूसा विशेष (एच. डी. 2851),  पूसागेहूँ -109 (एच. डी. 2894), पूसा सिंधु गंगा(एच. डी. 2967), एच. डी. 3086, डी. बी. डब्लू .-17 । बीज की मात्रा 100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर रखें। जिन खेतों में दीमक का प्रकोप हो तो क्लोरपाईरिफाँस (20 ईसी) @ 5 लीटर/हैक्टर की दर से पलेवा के साथ दें। नत्रजन, फास्फोरस तथा पोटाश उर्वरकों की मात्रा 120, 50 व 40 कि.ग्रा./हैक्टेयर होनी चाहिये।

4.) तापमान को ध्यान में रखते हुए किसान सरसों की बुवाई में ओर अधिक देरी न करें। बीज दर –1.5-2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड। बुवाई से पहले खेत में नमी के स्तर को अवश्य ज्ञात कर ले ताकि अंकुरण प्रभावित न हो। बुवाई से पहले बीजों को थीरम या केप्टान @ 2 से 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें। बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहता है। कम फैलने वाली किस्मों की बुवाई 30 सें. मी. और अधिक फैलने वाली किस्मों की बुवाई 45-50 सें.मी. दूरी पर बनी पंक्तियों में करें। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 12-15 सें.मी. कर ले। मिट्टी जांच के बाद यदि गंधक की कमी हो तो 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से अंतिम जुताई पर डालें।

5.) किसान चने की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। छोटी एवं मध्यम आकार के दाने वाली किस्मों के लिए 60–80कि.ग्रा. तथा बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 80–100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई30–35 सें. मी. दूर कतारों में करनी चाहिए। प्रमुख काबुली किस्में- पूसा 267, पूसा 1003, पूसा चमत्कार; देशी किस्में – सी. 235, पूसा 246, पी.बी.जी. 1, पूसा 372। बुवाई से पूर्व बीजों को राइजोबियम और पी.एस.बी. के टीकों (कल्चर) से अवश्य उपचार करें।

6.) किसान इस मौसम में जई तथा बरसीम की बुवाई कर सकते हैं। जई की उन्नत किस्में- जे.एच.ओ.-822, ओ.एल.-9 और पूसा ओट-5 तथा बरसीम की उन्नत किस्में- वरदान, बुंदेल बरसीम-1, मसकावी, जे.बी.-3. बीज दर–जई- 80-100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर और बरसीम- 25-30 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर।

7.) तापमान को ध्यान में रखते हुए मटर की बुवाई में ओर अधिक देरी न करेंअन्यथा फसल की उपज में कमी होगी तथा कीड़ों का प्रकोप अधिक हो सकता है। उन्नत किस्में – पूसा प्रगति, आर्किल, आजाद मटर-3, पंत मटर-3, बोनविले। बीजों को कवकनाशी  केप्टान या थीरम @ 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से मिलाकर उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें। गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा कर ले और राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दे तथा अगले दिन बुवाई करें।

8.) किसान इस समय लहसुन की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में –जी-1, जी-41, जी-50, जी-282.| खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें।

9.) आलू की बुवाई से किसानों को अधिक लाभ की प्राप्ति हो सकती है, क्योंकि यह फसल 80-90 दिन में तैयार हो जाती है। यह मौसम आलू की बुवाई के लिए अनुकुल है। उन्नत किस्म– कुफरी बादशाह, कुफरी बहार, कुफरी आनन्द, चिपसोना-1, चिपसोना-2, चिपसोना-3 ।

10.) किसान इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली-जापानी व्हाईट,हिल क्वीन, पूसा मृदुला (फ्रेच मूली); पालक-आल ग्रीन,पूसा भारती; शलगम-पूसा स्वेती या स्थानीय लाल किस्म;बथुआ- पूसा बथुआ-1; मेथी-पूसा कसुरी; गांठ गोभी-व्हाईट वियना,पर्पल वियना; तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें।

11.) वर्तमान मौसम प्याज की बुवाई के लिए अनुकूल है। बीज दर– 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर। बुवाई से पहले बीजों को केप्टान @ 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार अवश्य करें।

12.) यह समय ब्रोकली, पछेती फूलगोभी, बन्दगोभी तथा टमाटर की पौधशाला तैयार करने के लिए उपयुक्त है। पौधशाला भूमि से उठी हुई क्यारियों पर ही बनायें। जिन किसान भाईयों की पौधशाला तैयार है, वह मौसस को ध्यान में रखते हुये पौध की रोपाई ऊंची मेड़ों पर करें।

13.) गुलदाउदी, गैदें की तैयार पौध की मेड़ों पर रोपाई करें। ग्लेडिओलस की बीजों द्वारा बुवाई इस समय करें।

14.) रबी की फसलों की बुवाई से पहले किसान अपने-अपने खेतों को अच्छी प्रकार से साफ-सुथरा करें। मेड़ों, नालों, खेत के रास्तों तथा खाली खेतों को साफ-सुथरा करें ताकि कीटों के अंडे, रोगों के कारक नष्ट हो  सके  तथा खेत में सड़े गोबर की खाद का उपयोग करें क्योंकि यह मृदा के भौतिक तथा जैविक गुणों को सुधारती है तथा मृदा की जल धारण क्षमता भी बढ़ाती है।


सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

  • डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
  • डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)
  • डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)
  • डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
  • डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

 

स्रोत-

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थाननई दिल्‍ली – 110012  

 

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