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किसान भाईयों के लिए कृषि सम्बन्धी सलाह 02 जनवरी तक लागू - Kisan Suvidha
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किसान भाईयों के लिए कृषि सम्बन्धी सलाह 02 जनवरी तक लागू

कृषि सम्बन्धी सलाह 21 अक्टूबर

किसान भाईयों के लिए कृषि सम्बन्धी सलाह 02 जनवरी तक लागू

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि सम्बन्धी सलाह दी जाती है।

1.) तापमान में कमी को देखते हुए सभी फसलों एवं सब्जियों में हल्की सिंचाई शाम के समय करें यह फसलों को संभावित पाले से बचाने में सहायक होती है।

2.)देर से बोयी गईगेहूँ की फसल यदि 21-25 दिन की हो गयी तो पहली सिंचाई आवश्कयतानुसार करें तथा 3-4 दिन के बाद नत्रजन की शेष मात्रा का छिड़काव करें।

3.) गेहूँ की फसल में यदि दीमक का प्रकोप दिखाई दे, तो बचाव हेतु किसान क्लोरपायरीफाँस 20 ई.सी. @ 2.0 ली. प्रति एकड़ 20 कि.ग्रा. बालू में मिलाकर खेत में शाम को छिड़क दे, और सिंचाई करें।

4.) मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि सरसों की फसल में चेंपा कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। प्रारम्भिक अवस्था में प्रभावित भाग को काट कर नष्ट कर दे।

5.) चने की फसल में फली छेदक कीट के निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 10-15% फूल खिल गये हों। अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए।

6.) गोभीवर्गीय फसल मेंहीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं।

7.) इस मौसम में तैयार बन्दगोभी, फूलगोभी, गांठगोभी आदि की रोपाई मेड़ों पर कर सकते हैं।

8.) इस मौसम में पालक, धनिया, मेथी की बुवाई कर सकते हैं। पत्तों के बढ़वार के लिए 20 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं|

9.) इस मौसम में आलू तथा टमाटर में झूलसा रोग की निरंतर निगरानी करते रहें। लक्षण दिखाई देने पर कार्बंडिजम 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी या डाईथेन-एम-45 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें।

10.) प्याज में परपल ब्लोस रोग की निगरानी करते रहें। रोग के लक्षण पाये जाने पर डाएथेन- एम-45 @ 3 ग्रा./ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि(1 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें।

11.) मटर की फसल पर 2 % यूरिया के घोल का छिड़काव करें। जिससे मटर की फल्लियों की सख्याँ में बढोतरी होती है।

12.) कद्दूवर्गीय सब्जियों के अगेती फसल के पौध तैयार करने के लिए बीजों को छोटी पालीथीन के थेलों में भर कर पाली घरों में रखें।

  

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

  • डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
  • डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
  • डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)
  • डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)
  • डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
  • डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

 

स्रोत-

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थाननई दिल्‍ली – 110012  

 

Comments:

  • Shriram Bhasker
    05/12/2018 at 6:53 PM

    हमें एलोवेरा की किसानी करने चाहते हैं इसके लिए लागत वह पंजीकरण कैसे कराए जाए इसकी पूरी जानकारी मेरे को दी जाए मे श्री राम भास्कर बानपुर ललितपुर उत्तर प्रदेश मोबाइल नंबर 94 51227407

    • Shriram Bhasker
      05/12/2018 at 7:00 PM

      मेरा पंजीयन कैसे होगा और मेरे को सरकारी मदद कैसे मिलेगी

  • SannyCap
    08/12/2018 at 7:23 AM

    Make a more new posts please 🙂
    ___
    Sanny

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