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कीटनाशकों के प्रयोग में सावधानियाँ - Kisan Suvidha
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कीटनाशकों के प्रयोग में सावधानियाँ

कीटनाशकों के प्रयोग में सावधानियाँ

कीटनाशकों के प्रयोग में सावधानियाँ

फसलों कीं कीटों से सुरक्षा के लिए फसल रक्षा रसायनों अर्थात कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है । ये कीटनाशक जहरीले तथा मूल्यवान होते हैं जिनके प्रयोग की जानकारी न होने के कारण इनसे नुकसान भी हो सकता है । इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखने के साथ-साथ इनके प्रयोग के समय क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए, इसकी जानकारी किसानों को होना आवश्यक होता है कि उन पर लिखे हुए निर्देशों का पालन ठीक ढंग से किया जाए । जिसमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए । क्योंकि थोड़ी सी भी  असावधानी होने से बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है ।

कीटनाशकों के प्रयोग से पहले की सावधानियाँ

1. कीटों की अच्छी तरह पहचान कर लेना चाहिए । यदि पहचान संभव नहीं हो पा रही हो तो स्थानीय स्तर पर उपस्थित कीट विशेषज्ञ से कीट की पहचान कराकर ही कीटनाशक खरीदना चाहिए ।
2. कीट नाशक का प्रयोग तभी करना चाहिए जब कीट की आर्थिक क्षति स्तर सीमा बढ़ गयी हो ।
3. कीट को मारने का सही उपाय पता कर लेना चाहिए ।
4. प्रकोपित कीट के लिए संस्तुत की गई कीटनाशी रसायन को ही प्रयोग में लेना चाहिए ।
5. कीटनाशियों के विषाक्तता को प्रदर्शित करने के लिए कीटनाशक के डिब्बों पर तिकोने आकार का हरा या नीला या पीला अथवा लाल रंग का निशान बना होता है । जब कई कीटनाशी का प्रथम प्रयोग नहीं करना चाहिए । क्योंकि लाल निशान के कीटनाशी समस्त स्तनधारियों पर सबसे ज्यादा नुकसान करती है । लाल निशान वाले कीटनाशी की अपेक्षा पीले रंग वाली की अपेक्षा नीले रंग के निशान वाली कम नुकसान पहुँचाती है तथा सबसे कम नुकसान हरे रंग के कीटनाशी से होता है ।
6. कीटनाशक खरीदते समय हमेशा उसके बनने की तिथि एवं उपयोग करने की अन्तिम तिथि को अवश्य पढ़ लेना चाहिए ताकि पुरानी दवा से बचा जा सके ।
7. कीटनाशी के पैकिंग के साथ एक उपयोग करने की पुस्तिका अर्थात लीफलेट भी आता है । उसको भी पढ़ लेना चाहिए और उसमें दी गई चेतावनी का पालन करना चाहिए ।
8 .कीटनाशकों का भण्डारण हमेशा साफ-सुथरी एवं हवादार एवं सूखे स्थान पर करना चाहिए ।
9. यदि अलग-अलग समूहों के कीटनाशी का प्रयोग करना है तो एक के बाद दूसरे का प्रयोग करना चाहिए ।
10.ऐसे कीटनाशियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिसके प्रयोग से पत्तों में रासायनिक अम्ल बनता हो ।

कीटनाशकों का प्रयोग करते समय सावधानियाँ

1. शरीर को बचाने वाले कपड़े ठीक से पहन लेना चाहिए । जिससे यदि उसमें कीटनाशी लग जाए तो बदल कर दूसरे कपड़ें पहन सकें तथा हाथों में रबड़ के दस्ताने पहन लेना चाहिए ।
2.कीटनाशी छिड़कने वाले को छिड़काव की पूरी जानकारी होना चाहिए तथा उसके शरीर पर कोई घाव नहीं होना चाहिए ।
3. बहुत जहरीले कीटनाशी को प्रयोग करते समय अकेले नहीं रहना चाहिए ।
4. कीटनाशी का घोल बनाते समय किसी बच्चे या अन्य आदमी या जानवर को पास में नहीं रहने देना चाहिए ।
5.कीटनाशी को मिलाने के लिए लकड़ी का डण्डा प्रयोग करना चाहिए ।
6.साथ मिली हुई प्रयोग पुस्तिका को दुबारा पढ़ कर उसके अनुदेशों का पालन करना चाहिए ।
7.कीटनाशक छिड़कने वाले यंत्र की जांच कर लेना चाहिए । यदि खराब है तो पहले उसकी मरम्मत कर लनी चाहिए ।
8.कीटनाशी छिड़काव के बाद त्वचा को साफ करना चाहिए ।

9.तरल कीटनाशियों को सावधानीपूर्वक मशीन में डालना चाहिए और यह ध्यान देना चाहिए कि यह किसी प्रकार मुंह, कान, नाक आदि में न जाने पाये । यदि ऐसा होता है तो तुरन्त साफ पानी से बार बार धोना चाहिए ।
10. छिड़काव के समय साफ पानी की मात्रा पास में रखनी चाहिए ।
11.कीटनाशी का प्रयोग करते समय कोई खान-पान या धूम्रपान नहीं करना चाहिए ।
12.कीटनाशी मिलाते समय जिधर से हवा आ रही हो उसी तरफ खड़ा होना चाहिए ।
13.कीटनाशी का प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि कीटनाशी की मात्रा पूरी तरह पानी में मिल गई है ।
14.रसायन का धुंआ सांस के द्वारा अन्दर नहीं जाने देना चाहिए ।
15.हवा के विपरीत दिशा में खड़े होकर छिड़काव या बुरकाव नहीं करना चाहिए ।
16.नोजल की सफाई मुँह से या मुँह के पास लाकर नहीं करना चाहिए ।
17. एक बार में जितनी जरूरत हो उतनी ही कीटनाशी ले जाएं ।
18.छिड़काव के लिए उपयुक्त समय सुबह या सांयकाल होती है तथा यह ध्यान रखना चाहिए कि हवा की गति 7 किमी./घण्टा से कम  होना चाहिए तथा तापमान 21 डिग्री सेंटीग्रेट के आस पास करना सर्वोत्तम होता है ।
19.फूल आने पर फसलों पर कम छिड़काव करना चाहिए और यदि छिड़काव करना हो तो हमेशा सांयकाल में ही करना चाहिए । जिससे मधुमक्खियां रसायन से प्रभावित न हों ।
20.कीटनाशियों का व्यक्ति पर प्रभाव दिखने पर डाॅक्टर के पास ले जाएं साथ में कीटनाशी का डिब्बा भी ले जाएं ।

 

कीटनाशकों  के प्रयोग के बाद सावधानियाँ

1.बचे हुए कीटनाशक की शेष मात्रा को सुरक्षित भण्डारित कर देना चाहिए ।
2.कभी भी कीटनाशी का घोल पम्प में नहीं छोड़ना चाहिए ।
3. पम्प को ठीक से साफ करके ही भण्डार गृह में रखना चाहिए ।
4.खाली डिब्बे को किसी अन्य काम में न लेकर के बल्कि उसे तोड़कर 2 फिट गहरे मिट्टी में दबा देना चाहिए ।
5.कगज या प्लास्टिक के डिब्बे को यदि जलाना है तो उसके धुंए के पास खड़े नहीं होना चाहिए ।
6.कीटनाशी छिड़काव के समय प्रयोग किए गए कपड़े, बर्तन आदि को ठीक प्रकार से ही धोकर रखना चाहिए ।
7.कीटनाशी का छिड़काव करने के बाद ठीक से स्नान करक कपड़े पहन लेना चाहिए ।
8.जो भी कीटनाशी छिड़के उसका ब्योरा लिखकर रख लेना चाहिए ।
9. कीटनाशी छिड़काव के बाद छिड़के गये खेत में किसी अन्य आदमी या जानवर को कुछ देर तक नहीं जाने देना चाहिए ।
10.  कीटनाशी छिड़काव के बाद 6 घंटे तक वर्षा नहीं होनी चाहिए । यदि 6 घ्ंाटे के अन्दर वर्षा हो जाती है तो पुनः छिड़काव करना चाहिए ।
11. अन्तिम छिड़काव व फसल की कटाई या तुड़ाई में दवा में बताए गये अन्तर का अवश्य ध्यान रखना चाहिए ।

विष का उपचार

सभी सावधानियां रखने के बावजूद भी यदि कोई व्यक्ति इन कीटनाशियों का शिकार हो जाए तो निम्नलिखित सावधानियां अपनानी चाहिए:-
1.रोगी के शरीर से विष को शीघ्राशीघ्र निकालने का प्रयास करना चाहिए ।
2. विषमारक दवा का प्रयोग करना चाहिए ।
3. रोगी को तुरन्त किसी पास के अस्पताल या डाॅक्टर के पास ले जाना चाहिए ।
4.यदि जहर खा लिया है तो एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक मिलाकर उल्टी करानी चाहिए अथवा गुनगुने पानी में साबुन घोलकर देना चाहिए अथवा एक गिलास गुनगुने पानी में 1 ग्राम जिंक सल्फेट मिला कर देना चाहिए ।
5.यदि व्यक्ति ने विष सूंघ लिया है तो शीघ्र ही खुले स्थान पर ले जाना चाहिए । शरीर के कपड़े ढीले कर देना चाहिए । यदि दौरे पड़ रहे हैं तो अंधेरे स्थान पर ले जाना चाहिए । यदि सांस लेने में समस्या हो रही है तो पेट के सहारे लिटाकर उसकी बाहों को सामने की ओर फैला लें एवं रोगी की पीठ को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाएं तथा कृत्रिम श्वांस का भी प्रबंध रखें ।
इस तरह उपरोक्त सावधानियों को ध्यान रखते हुए यदि कीटनाशियों का प्रयोग किया जायेगा तो इनसे किसी प्रकार का नुकसान होने से बचाया जा सकता है ।

 

स्रोत-

  • कृषि विभाग उत्तर प्रदेश

 

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